Saturday, 22 October 2016

*राम राज्य कभी नही आना चाहिए*

*राम राज्य कभी नही आना चाहिए*
                       

  राम के समय को तुम रामराज्य कहते हो। हालात आज से भी बुरे थे। कभी भूल कर रामराज्य फिर मत ले आना! एक बार जो भूल हो गई, हो गई। अब दुबारा मत करना।
   राम के राज्य में आदमी बाजारों में गुलाम की तरह बिकते थे। कम से कम आज आदमी बाजार में गुलामों की तरह तो नहीं बिकता! और जब आदमी गुलामों की तरह बिकते रहे होंगे, तो दरिद्रता निश्चित रही होगी, नहीं तो कोई बिकेगा कैसे ? किसलिए बिकेगा ? दीन और दरिद्र ही बिकते होंगे, कोई अमीर तो बाजारों में बिकने न जाएंगे। कोई टाटा, बिड़ला, डालमिया तो बाजारों में बिकेंगे नहीं।
  स्त्रियां बाजारों में बिकती थीं! वे स्त्रियां गरीबों की स्त्रियां ही होंगी। उनकी ही बेटियां होंगी। कोई सीता तो बाजार में नहीं बिकती थी। उसका तो स्वयंवर होता था। तो किनकी बच्चियां बिकती थीं बाजारों में ? और हालात निश्चित ही भयंकर रहे होंगे। क्योंकि बाजारों में ये बिकती स्त्रियां और लोग--आदमी और औरतें दोनों, विशेषकर स्त्रियां--राजा तो खरीदते ही खरीदते थे, धनपति तो खरीदते ही खरीदते थे, जिनको तुम ऋषि-मुनि कहते हो, वे भी खरीदते थे! गजब की दुनिया थी! ऋषि-मुनि भी बाजारों में बिकती हुई स्त्रियों को खरीदते थे!
  अब तो हम भूल ही गए वधु शब्द का असली अर्थ। अब तो हम शादी होती है नई-नई, तो वर-वधु को आशीर्वाद देने जाते हैं। हमको पता ही नहीं कि हम किसको आशीर्वाद दे रहे हैं! राम के समय में, और राम के पहले भी--वधु का अर्थ होता था, खरीदी गई स्त्री! जिसके साथ तुम्हें पत्नी जैसा व्यवहार करने का हक है, लेकिन उसके बच्चों को तुम्हारी संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होगा! पत्नी और वधु में यही फर्क था। सभी पत्नियां वधु नहीं थीं, और सभी वधुएं पत्नियां नहीं थीं। *वधु नंबर दो की पत्नी थी।* जैसे नंबर दो की बही होती है न, जिसमें चोरी-चपाटी का सब लिखते रहते हैं! ऐसी नंबर दो की पत्नी थी वधु।
  *ऋषि-मुनि भी वधुएं रखते थे!* और तुमको यही भ्रांति है कि ऋषि-मुनि गजब के लोग थे। कुछ खास गजब के लोग नहीं थे। वैसे ऋषि-मुनि अभी भी तुम्हें मिल जाएंगे।
  एक मां अपने छोटे से बच्चे को कह रही थी कि बेटा, तू नौ-नौ बजे उठता है! अरे, ऋषि-मुनि की संतान हो; ब्रह्ममुहूर्त में उठना चाहिए! ऋषि-मुनि हमेशा ब्रह्ममुहूर्त में उठते थे!
उस बेटे ने कहा कि नहीं मां; ऋषि तो कभी आठ बजे के पहले नहीं उठते। मुझे पता है। और मुनि भी कभी नौ बजे के पहले नहीं उठते।
मां ने कहा, तू यह कहां की बातें कर रहा है ? उसने कहा, मुझे मालूम है। ऋषि कपूर आठ बजे उठता है और दादा मुनि अशोक कुमार नौ बजे उठते हैं!
   इन ऋषि-मुनियों में और तुम्हारे पुराने ऋषि-मुनियों में बहुत फर्क मत पाना तुम। कम से कम इनकी वधुएं तो नहीं हैं! कम से कम ये बाजार से स्त्रियां तो नहीं खरीद ले आते! इतना बुरा आदमी तो आज पाना मुश्किल है जो बाजार से स्त्री खरीद कर लाए। आज यह बात ही अमानवीय मालूम होगी! मगर यह जारी थी!
  *रामराज्य में शूद्र को हक नहीं था वेद पढ़ने का! यह तो कल्पना के बाहर की बात थी, कि डाक्टर अंबेदकर जैसा अतिशूद्र और राम के समय में भारत के विधान का रचयिता हो सकता था!* असंभव !! खुद राम ने एक शूद्र के कानों में सीसा पिघलवा कर भरवा दिया था--गरम सीसा, उबलता हुआ सीसा! क्योंकि उसने चोरी से, कहीं वेद के मंत्र पढ़े जा रहे थे, वे छिप कर सुन लिए थे। यह उसका पाप था; यह उसका अपराध था। और *राम तुम्हारे मर्यादा पुरुषोत्तम हैं! राम को तुम अवतार कहते हो! और महात्मा गांधी रामराज्य को फिर से लाना चाहते थे।* क्या करना है? शूद्रों के कानों में फिर से सीसा पिघलवा कर भरवाना है ? उसके कान तो फूट ही गए होंगे। शायद मस्तिष्क भी विकृत हो गया होगा। उस गरीब पर क्या गुजरी, किसी को क्या लेना-देना! शायद आंखें भी खराब हो गई होंगी। क्योंकि ये सब जुड़े हैं; कान, आंख, नाक, मस्तिष्क, सब जुड़े हैं। और दोनों कानों में अगर सीसा उबलता हुआ...!
   तुम्हारा खून क्या खाक उबल रहा है निर्मल घोष! उबलते हुए शीशे की जरा सोचो! उबलता हुआ सीसा जब कानों में भर दिया गया होगा, तो चला गया होगा पर्दों को तोड़ कर, भीतर मांस-मज्जा तक को प्रवेश कर गया होगा; मस्तिष्क के स्नायुओं तक को जला गया होगा। फिर इस गरीब पर क्या गुजरी, किसी को क्या लेना-देना है! धर्म का कार्य पूर्ण हो गया। *ब्राह्मणों ने आशीर्वाद दिया कि राम ने धर्म की रक्षा की। यह धर्म की रक्षा थी! और तुम कहते हो, "मौजूदा हालात खराब हैं!'*
   युधिष्ठिर जुआ खेलते हैं, फिर भी धर्मराज थे! और तुम कहते हो, मौजूदा हालात खराब हैं! आज किसी जुआरी को धर्मराज कहने की हिम्मत कर सकोगे ? और जुआरी भी कुछ छोटे-मोटे नहीं, सब जुए पर लगा दिया। पत्नी तक को दांव पर लगा दिया! एक तो यह बात ही अशोभन है, क्योंकि पत्नी कोई संपत्ति नहीं है। मगर उन दिनों यही धारणा थी, स्त्री-संपत्ति!    
   उसी धारणा के अनुसार आज भी जब बाप अपनी बेटी का विवाह करता है, तो उसको कहते हैं कन्यादान! क्या गजब कर रहे हो! गाय-भैंस दान करो तो भी समझ में आता है। कन्यादान कर रहे हो! यह दान है? स्त्री कोई वस्तु है? ये असभ्य शब्द, ये असंस्कृत हमारे प्रयोग शब्दों के बंद होने चाहिए। अमानवीय हैं, अशिष्ट हैं, असंस्कृत हैं।
   मगर युधिष्ठिर धर्मराज थे। और दांव पर लगा दिया अपनी पत्नी को भी! हद्द का दीवानापन रहा होगा। पहुंचे हुए जुआरी रहे होंगे। इतना भी होश न रहा। और फिर भी धर्मराज धर्मराज ही बने रहे; इससे कुछ अंतर न आया। इससे उनकी प्रतिष्ठा में कोई भेद न पड़ा। इससे उनका आदर जारी रहा।
   भीष्म पितामह को ब्रह्मज्ञानी समझा जाता था। मगर ब्रह्मज्ञानी कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ रहे थे! गुरु द्रोण को ब्रह्मज्ञानी समझा जाता था। मगर गुरु द्रोण भी कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ रहे थे! अगर कौरव अधार्मिक थे, दुष्ट थे, तो कम से कम भीष्म में इतनी हिम्मत तो होनी चाहिए थी! और बाल-ब्रह्मचारी थे और इतनी भी हिम्मत नहीं? तो खाक ब्रह्मचर्य था यह! किस लोलुपता के कारण गलत लोगों का साथ दे रहे थे? और द्रोण तो गुरु थे अर्जुन के भी, और अर्जुन को बहुत चाहा भी था। लेकिन धन तो कौरवों के पास था; पद कौरवों के पास था; प्रतिष्ठा कौरवों के पास थी। संभावना भी यही थी कि वही जीतेंगे। राज्य उनका था। पांडव तो भिखारी हो गए थे। इंच भर जमीन भी कौरव देने को राजी नहीं थे। और कसूर कुछ कौरवों का हो, ऐसा समझ में आता नहीं। जब तुम्हीं दांव पर लगा कर सब हार गए, तो मांगते किस मुंह से थे? मांगने की बात ही गलत थी। जब हार गए तो हार गए। खुद ही हार गए, अब मांगना क्या है ?
    लेकिन गुरु द्रोण भी अर्जुन के साथ खड़े न हुए; खड़े हुए उनके साथ जो गलत थे।
   *यही गुरु द्रोण एकलव्य का अंगूठा कटवा कर आ गए थे अर्जुन के हित में, क्योंकि तब संभावना थी कि अर्जुन सम्राट बनेगा। तब इन्होंने एकलव्य को इनकार कर दिया था शिक्षा देने से। क्यों? क्योंकि शूद्र था।* और तुम कहते हो, "मौजूदा हालात बिलकुल पसंद नहीं!'
   निर्मल घोष, एकलव्य को मौजूदा हालात उस समय के पसंद पड़े होंगे ? उस गरीब का कसूर क्या था ? अगर उसने मांग की थी, प्रार्थना की थी कि मुझे भी स्वीकार कर लो शिष्य की भांति, मुझे भी सीखने का अवसर दे दो ? लेकिन नहीं, शूद्र को कैसे सीखने का अवसर दिया जा सकता है !!!
   मगर एकलव्य अनूठा युवक रहा होगा। अनूठा इसलिए कहता हूं कि उसका खून नहीं खौला। खून खौलता तो साधारण युवक, दो कौड़ी का। सभी युवकों का खौलता है, इसमें कुछ खास बात नहीं। उसका खून नहीं खौला। शांत मन से उसने इसको स्वीकार कर लिया। एकांत जंगल में जाकर गुरु द्रोण की प्रतिमा बना ली। और उसी प्रतिमा के सामने शर-संधान करता रहा। उसी के सामने धनुर्विद्या का अभ्यास करता रहा। अदभुत युवक था। उस गुरु के सामने धनुर्विद्या का अभ्यास करता रहा जिसने उसे शूद्र के कारण इनकार कर दिया था; अपमान न लिया। अहंकार पर चोट तो लगी होगी, लेकिन शांति से, समता से पी गया।
धीरे-धीरे खबर फैलनी शुरू हो गई कि वह बड़ा निष्णात हो गया है। तो गुरु द्रोण को बेचैनी हुई, क्योंकि बेचैनी यह थी कि खबरें आने लगीं कि अर्जुन उसके मुकाबले कुछ भी नहीं। और अर्जुन पर ही सारा दांव था। अगर अर्जुन सम्राट बने, और सारे जगत में सबसे बड़ा धनुर्धर बने, तो उसी के साथ गुरु द्रोण की भी प्रतिष्ठा होगी। उनका शिष्य, उनका शागिर्द ऊंचाई पर पहुंच जाए, तो गुरु भी ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। उनका सारा का सारा न्यस्त स्वार्थ अर्जुन में था। और एकलव्य अगर आगे निकल जाए, तो बड़ी बेचैनी की बात थी।
    *तो यह बेशर्म आदमी, जिसको कि ब्रह्मज्ञानी कहा जाता है, यह गुरु द्रोण, जिसने इनकार कर दिया था एकलव्य को शिक्षा देने से, यह उससे दक्षिणा लेने पहुंच गया!* शिक्षा देने से इनकार करने वाला गुरु, जिसने दीक्षा ही न दी, वह दक्षिणा लेने पहुंच गया! हालात बड़े अजीब रहे होंगे! शर्म भी कोई चीज होती है! इज्जत भी कोई बात होती है! आदमी की नाक भी होती है! ये गुरु द्रोण तो बिलकुल नाक-कटे आदमी रहे होंगे! किस मुंह से--जिसको दुत्कार दिया था--उससे जाकर दक्षिणा लेने पहुंच गए!
और फिर भी मैं कहता हूं, एकलव्य अदभुत युवक था; दक्षिणा देने को राजी हो गया। उस गुरु को, जिसने दीक्षा ही नहीं दी कभी! यह जरा सोचो तो! उस गुरु को, जिसने दुत्कार दिया था और कहा कि तू शूद्र है! हम शूद्र को शिष्य की तरह स्वीकार नहीं कर सकते!
बड़ा मजा है! *जिस शूद्र को शिष्य की तरह स्वीकार नहीं कर सकते, उस शूद्र की भी दक्षिणा स्वीकार कर सकते हो!* मगर उसमें षडयंत्र था, चालबाजी थी।
   उसने चरणों पर गिर कर कहा, आप जो कहें। मैं तो गरीब हूं, मेरे पास कुछ है नहीं देने को। मगर जो आप कहें, जो मेरे पास हो, तो मैं देने को राजी हूं। यूं प्राण भी देने को राजी हूं।
तो क्या मांगा? *मांगा कि अपने दाएं हाथ का अंगूठा काट कर मुझे दे दे!*
   जालसाजी की भी कोई सीमा होती है! अमानवीयता की भी कोई सीमा होती है! कपट की, कूटनीति की भी कोई सीमा होती है! और यह ब्रह्मज्ञानी! उस गरीब एकलव्य से अंगूठा मांग लिया। और अदभुत युवक रहा होगा, निर्मल घोष, दे दिया उसने अपना अंगूठा! तत्क्षण काट कर अपना अंगूठा दे दिया! जानते हुए कि दाएं हाथ का अंगूठा कट जाने का अर्थ है कि मेरी धनुर्विद्या समाप्त हो गई। अब मेरा कोई भविष्य नहीं। इस आदमी ने सारा भविष्य ले लिया। शिक्षा दी नहीं, और दक्षिणा में, जो मैंने अपने आप सीखा था, उस सब को विनिष्ट कर दिया।
             *---ओशो--*
----------------------------------------

*"कहीं हम भूल न जाएँ~*

👉🏾हिन्दू धर्म में वर्ण, वर्ण में शूद्र, शूद्र में जाति, जाति में क्रमिक उंच नीच... और ब्राह्मण के आगे सारे नींच.. अब गर्व से कैसे कहें कि हम हिन्दू हैं  ???
 
*एक मात्र उपाय--*  

शूद्र(obc), अवर्ण(sc/st)
    जाति तोड़ो...समाज जोड़ो

       मन्दिर नहीं, स्कूल चाहिए !
          धर्म नहीं, अधिकार चाहिए !!

अख़बार/टीवी बन्द करो ।
  फेसबुक/वाट्सएप यूज करो ।।

*🏃कृपया शेयर करें ....*

Wednesday, 19 October 2016

वर्ण

इस देश में तीन वर्ण हैं , जिन्हें सवर्ण कहा जाता है ।
स + वर्ण = सवर्ण अर्थात वर्ण सहित
चौथा शूद्र है जिसका कोई वर्ण नहीं ।
1. ब्राह्मण
2.क्षत्रिय
3.वैश्य
और
4. शूद्र - (ओबीसी , एससी, एसटी)
👉पहला ब्राह्मण वर्ण में कोई जाति नहीं । केवल गोत्र है , जिनमें आपस में शादी विवाह में कोई रुकावट नहीं।
👉दूसरे वर्ण क्षत्रिय में कोई जाति नहीं , केवल गौत्र है , जिनमें आपस में शादी विवाह में कोई रुकावट नहीं ।
👉इसी प्रकार तीसरा वर्ण वैश्य ।
आपस में इनमें भी कोई जाति व्यवस्था नहीं , केवल गौत्र हैं ,जैसे अग्रवाल , बंसल , कंसल, गुप्ता , गोयल आदि । इनमें भी आपस में शादी विवाह में कोई रुकावट नहीं ।
👉चौथा नम्बर पर आते हैं शूद्र जो ब्रह्मा के पैरों से पैदा हुए बताये जाते हैं हिन्दू शास्त्र और ग्रंथों के अनुसार।
माँ की कोख का कोई जिक्र नहीं ?
शूद में जाति , जाति में गोत्र ,
गोत्र भी 1000 , 2000 नहीं बल्कि लाखों में ।
👉जातियां ?
वह भी सैकड़ों नहीं , हजारों में 6743 जातियां।
👉गूजर , पटेल , पाटीदार , अहीर , यादव , लौधा , किसान , लुहार , कुम्हार , सैनी , माली , कश्यप , कहार ,कुर्मी , चूहड़ा ( बाल्मीकि ) , चमार , तेली , तमौली , नाई ,धौबी , जाधव , जाट , जाटव ,धींवर , महार ,
और अनेकों हजारों जातियां हैं ?
👉इनमें अन्तरजातीय शादी विवाह की बात दूर , संग बैठकर आपस में बात करना भी मुंगेरीलाल के सपने जैसा है।
👉1950 के बाद , वर्तमान परिवेश में आपसी घृणा में कमी तो आयी है ,परंतु आपसी सामंजस्य , प्रेम और प्यार का अभाव यथावत विद्यमान है ।
👉 इन्हीं शूद्रों को हिन्दू शास्त्रों में सेवा करने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गयी है।
👉 साहित्य समाज का दर्पण है । सम्बत् 1680 से पहले नारी तथा शूद्रों को बेरहमी से प्रताड़ित किया जाता था ,जो बाद में भी जारी रहा । इसी लिए तुलसीदास की रचनाओं में इनकी प्रताड़ना का स्पष्ट विवरण मिलता हैं :
ढोल गवांर शूद्र पशु नारी
ये सब ताड़न के अधिकारी।
वर्ग व्यवस्था तो हो सकती है परन्तु वर्ण एवं जाति व्यवस्था दुनिया के किसी देश में नहीं है ,अलावा भारत या इससे विभाजित देश ।
और यह व्यवस्था बनाई उन्होंने जो स्वयं को भारत में असुरक्षित समझते थे ।
" विदेशी आर्यंस. " यही अार्य ही सवर्ण है !

आरक्षण क्यों जरुरी है

** *72 करोड़ ओबीसी और 32 करोड़ एस.सी/एस.टी जागो* **

*जो बोलते है आरक्षण की वजह से जॉब नही मिल रही वो अवश्य जानले कि तुम्हारी जॉब कोन हडप रहा है..*

** *जानो और जागो* **

*"आरक्षण --- जिसकी जितनी संख्या भारी,*
*उसकी उतनी हिस्सेदारी"*

** *देश का SC/ST/OBC समाज जिनकी संख्या (87.5%) है वो अब जाग गया है.***

** *भारत में लोकतंत्र लागू है पर इन 66 वर्ष में सरकारों ने यहां ब्राह्मणतंत्र स्थापित कर लिया है, ये रहे सबूत **

*(1) राष्ट्रपति - प्रणव मुखर्जी - ब्राह्मण*

*(2) प्रधानमंत्री - नरेंद्र मोदी - बनिया*

*(3) ग्रहमंत्री - राजनाथ सिंह - ठाकुर*

*(4) विदेशमंत्री - सुषमा स्वराज - ब्राह्मण*

*(5) वित्तमंत्री - अरूण जेटली - ब्राह्मण*

*(6) रक्षामंत्री - मनोहर पारीकर - ब्राह्मण*

*(7) सड़क एवं परिवाहन मंत्री - नितिन गडकरी - ब्राह्मण*

*(8) महिला एवं बालविकास मंत्री - मेनका गांधी - वैश्य*

*(9) लोकसभा स्पीकर - सुमित्रा महाजन - ब्राह्मण*

*(10) प्रधानमंत्री के मुख्यसचिव - न्रपेंद्र मिश्रा - ब्राह्मण*

*(11) राष्ट्रपति कार्यालय में कुल 49 अधिकारी काम करते है. जिनमें SC/ST/OBC के होने थे 45, जबकि है केवल 0.सामान्य के होने थे 5, जबकि है 49.*

*(12) प्रधानमंत्री कार्यालय में कुल 53 अधिकारी काम करते है, जिनमें SC/ST/OBC के होने थे 47, जबकि हैं केवल 0. सामान्य के होने थे 6, जबकि है 53.*

*(13) विदेशी दूतावास में कुल 140 अधिकारी काम करते हैं, जिनमें SC/ST/OBC के होने थे 91, जबकि है केवल 0, सामान्य के होने थे 21 , जबकि है 140.*

*(14) भारत सरकार में कुल 84 सचिव हैं, जिनमें SC/ST/OBC के होने थे 75, जबकि है केवल 0. सामान्य के होने थे 8 , जबकि है 84.*

*(15) भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में कुल 27 मंत्री हैं. जिनमें SC/ST/OBC के होने थे 24 , जबकि है केवल 1, सामान्य के होने थे 3, जबकि है 20.*

*टाप 10 मंत्रीयों में सो एक भी ओबीसी नहीं.*

*(16) भारत में कुल 4657 आई.ए.एस. हैं. जिनमें ओबीसी के होने थे 3027, जबकि हैं केवल 655. सामान्य के होने थे 699, जबकि है 2993.*

*(17) देश के 18 राज्यों के हाईकोर्ट में कुल 481 जज हैं, जिनमें ओबीसी के होने थे 313, जबकि हैं केवल 36. सामान्य जाति को होने थे 72, जबकि है 426.*

*(18) मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट में कुल 30 जज हैं. जिनमें से SC/ST/OBC के होने थे 20, जबकि है केवल 0. सामान्य जाति के होने थे 5 , जबकि है 30.*

*(19) भारत के सुप्रीम कोर्ट में कुल 23 जज हैं. जिनमें ओबीसी के होने थे 15, जबकि हैं केवल 0. सामान्य जाति के होना थे 3, जबकि हैं 23.*

*(20) भारत के 46 विश्वविद्यालयों में कुल 108 कुलपति हैं . जिनमें ओबीसी के होने थे 70, जबकि है केवल 0. सामान्य के होने थे 16, जबकि है 108*

*(21) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU ) में कुल 670 प्रोफेसर हैं, जिनमें ओबीसी के होने थे 435, जबकि हैं केवल 0. सामान्य जाति के होने थे 100, जबकि हैं 670.*

*(22) दिल्ली विश्वविद्यालय ( DU) में  कुल 249 प्रोफेसर हैं. जिनमें ओबीसी के होने थे 162, जबकि हैं केवल 0. सामान्य जाति के होने थे 37, जबकि हैं 249.*

*(23) जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में कुल 470 प्रोफेसर हैं. जिनमें से ओबीसी के होने थे 305, जबकि हैं केवल 2. सामान्य जाति के होने थे 70, जबकि हैं 426.*

*(24) आई.आई.एम. लखनऊ में कुल 40 प्रोफेसर हैं, जिनमें से ओबीसी के होने थे 26, जबकि हैं केवल 1. सामान्य जाति के होने थे 6, जबकि है 30.*

*(25) भारत सरकार के कार्मिक मंञालय की रिपोर्ट 13 फरवरी 2012 के अनुसार दिनांक 01/12/10 तक विभिन्न वर्गों की नौकरी में संख्या और प्रतिनिधित्व निम्न है.*

प्रथम श्रेणी में  :-
वर्ग.     संख्या    आरक्षण अस्तित्व मे
*Open (12.5%) - 0%     75.5%,*
*OBC   (65%) - 27%      8.4%*
*SC/ST(22.5%)22.5%   16.1%*

द्वितीय श्रेणी में :- आरक्षण अस्तित्व
Open (12.5%) - 0%    82.2%,
OBC    (65%) - 27%     6.1%
SC/ST(22.5%)22.5%   11.7%

तीसरी श्रेणी में :- आरक्षण अस्तित्व
Open (12.5%) - 0%  71.9%
OBC  (65%) - 27%  14.8%
SC/ST(22.5%)22.5% 13.3%

चतुर्थ श्रेणी में :- आरक्षण अस्तित्व
Open (12.5%) - 0%         69%
OBC (65%) - 27%        15.2%
SC/ST(22.5%) 22.5%  15.8%

(26) देश के उद्योग जगत की विभिन्न कंपनियों के बोर्ड मेम्बरों की स्थिति निम्न हैं.
*Gen -12.5% -  है -92.6%*
*Sc/St-22.5%- है -3.5%*
*OBC- 65% -   है-3.8%*

(29) देश में आरक्षण की स्थिति :-

वर्ग.      संख्या   आरक्षण
*Sc -   15% -    15%*
*St -    7.5% -   7.5%*
*Obc-  65%  -   27%*

(30) मध्यप्रदेश में वर्तमान में आरक्षण की स्थिति :-

वर्ग.      संख्या      आरक्षण
*एससी -  16%   -  16%*
*एसटी -   20%   - 20%*
*ओबीसी- 65%   - 14%*

*जबकि ओबीसी को केरल में 40%, बिहार में 34%, कर्नाटका में 32% और महाराष्ट्रा में 32% आरक्षण है.*

*(31) सवर्णों का नौकरी में 79% हिस्सा होने के बाद भी हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने संविधान के विरूद्ध जाकर उन्हे 14% आरक्षण दिया है.*

*(33) संविधान द्वारा गठित मंडल कमीशन ने SC/ST/OBC के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण दिया, परन्तु सुप्रीमकोर्ट ने 16 नबम्वर 1992 को फैसला देकर उस पर रोक लगा कर  धोका किया है.*

*(33) हाल ही में गुजरात, राजस्थान और उ.प्र. हाईकोर्ट ने तथा सुप्रीमकोर्ट ने आरक्षण के संबंध में संविधान के विरूद्ध फैसले दिये हैं. इससे लगता है कि लोकतंत्र , संविधान और आरक्षण बड़े खतरे में है.*

*(34) 100 दिन के लिये मुझे सत्ता दे दो. यदि काला धन वापस नहीं ला पाया तो मुझे फांसी दे देना -- नरेंद्र मोदी -- 3 फरवरी 2013*

*(35) 3% ब्राह्मण, जो ग्राम पंचायत का चुनाव भी नहीं जीत सकता है वो देश की पंचायत ( संसद) पर कब्जा जमायें बैढ़ा है..*

*(36) सरकारी विद्यालयों का निजीकरण नहीं बल्कि निजी विद्यालयों का राष्ट्रीयकरण होना चाहिये.*

*(37) पाकिस्तान में पेट्रोल 26 रू. लीटर है तो भारत में 78 रू. लीटर क्यों ?*

*(38) संस्क्रत से पी.एच.डी. किया हुआ एक ओबीसी को मंदिर में पूजा करवाने का अधिकार नहीं है, लेकिन एक पांचवी फेल ब्राह्मण को सभी अधिकार है , क्यों ? 5000 सालो से चला से चला आ रहा ये कैसा आरक्षण है ?*

*(39) देश के 4 बड़े मंदिरों में प्रतिदिन 8 करोंड़ रू.की चढौत्री आती है. इस पर 100% अधिकार ब्राह्मणों का ही क्यों ? मंदिरों की संपत्ति देशवासियों में बाट दी जाये तो सभी करोड़पति हो जायें.*

*(40) म.प्र. सरकार पर 125 हजार करोड़ का कर्ज है. प्रत्येक व्यक्ति पर 12000 रू.है.*

*(41) अमेरिका देखा, पेरिस देखा, और देखा जापान .कनाडा देखा, चाईना देखा, सब देखा मेरी जान..*

*मगर न देखी उजड़ी खेती, और मरता किसान ......*

*(42) किसान प्रेम प्रसंग के कारण आत्महत्या कर रहें - राधामोहन सिंह - केंद्रीय क्रषिमंत्री*

*(43) म.प्र. में किसानों की फसल का 2136 करोड़ का बीमा हुआ. 141 करोड़ रू. की प्रीमियम कंपनी को दी गई. जब किसानों को मुआबजा देने की बारी आई तो केवल 1.65 करोड़ रू ही क्यों  दिये गये ??*

*(44) केंद्र की पिछली सरकार में क्रषि बजट 20,208 करोड़ रू. था, मोदी सरकार ने 13,523 करोड़ रू. कर दिया. कटौती - 7685 करोड़ रू. की.*

*(45) भारत में एक दिन में 46 किसान आत्महत्या करते है.1995 से 2013 के बीच 2,96,438 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.*

*(46) भारत सरकार के स्वास्थ बजट में पिछली सरकार में 35,163 करोड़ रू. का प्रावधान था. इस बार मोदी सरकार ने 29,653 करोड. रू. का प्रावधान किया है. कटौती - 5510 करोड़ रू.की.*

*(47) पुलिस सुधार फंड में 1500 करोड़ की कटौती.*

*(48) इस सरकार नें एससी/एसटी के बजट में 32000 करोड़ की कटौती की है.*

*(49) करदाताओं के पैसे पर मौज कर रहे है उद्योगपति- रघुराज रंजन - गवर्नर भारतीय रिजर्व बैंक.*

*(50) देश में प्रतिवर्ष 35 लाख युवा ग्रेजुएट होते है, तथा 65 लाख युवा 12 वीं पास करते हैं. परन्तु सरकार ने 30 लाख जॉव की छटनी की है.*

*(53) अर्जुन सेन गुप्ता कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार :- देश में 29 करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हैं, 83 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन जी रहे हैं.*

*लेख की साम्रगी - विभिन्न समाचार पत्रों, मंडल आयोग की रिपोर्ट, लोकसभा में लगाये प्रश्न,I'm आर.टी.आई.,विभिन्न कमीशनों की रिपोर्ट और विभिन्न लेखकों की पुस्तकों पर आधार

🙏🙏जय भारत 🙏🙏भीम

Thursday, 13 October 2016

Rss के बारे में

👉🏻 *इंडिया का सबसे बड़ा गद्दार व आतंकवादी संगठन RSS  की पोल खोलों ....*✍🏻
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
👉🏻 RSS का असली नाम  रेसियल सुपिरियरिटी सिस्टम अर्थात उच्च जातिय व्यवस्था है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नहीं |
👉🏻 RSS ने अपने कार्यालय पर तिरंगा झंडा लहराना *52 वर्षो* के बाद शुरु किया है|
👉🏻 RSS का आज़ादी के आंदोलन से कोई सरोकार नहीं है ।
👉🏻 जब 15 अगस्त को देश आजाद हुआ तब RSS ने स्वाधीनता दिवस मनाने से इंकार किया था और 1947 से लेकर 2002 तक नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा कभी नहीं फहराया।
👉🏻 वर्ष 2002 के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद तिरंगा फहराया गया ।
👉🏻 सरदार पटेल ने RSS पर जब प्रतिबन्ध (बैन) लगाया था तब उसने (RSS) ने बैन हटाने के लिए जो हलफनामा दिया था उसमे निम्नलिखित मुख्य बातें थी ~
1) कि वो भारत के संविधान को मानेगा, जिसको वो नहीं मानता था और आज भी नहीं मानता है | इसीलिए स्वयं सेवक गैर संवैधानिक बयान देते है ।
2) संविधान में निहित राष्ट्रीय प्रतीकों का विरोध नहीं करेगा, जिसके वो हमेशा खिलाफ रहा और आज भी है |
3) RSS कभी भी राजनीति में नहीं आएगा, परंतु आज वो सरकार में है ।
👉🏻 कुल मिलाकर RSS देशद्रोही संस्था है जो तब भी थी और आज भी देश का सामाजिक ताना बाना बिखेरना चाहती है।
👉🏻 जब भी कोई RSS वाला देशभक्ति की बात करे, उसे कहिए
*"केस नंबर 176, नागपुर, 2001"*
वह शर्म से सिर झुका लेगा | हां, यह तभी होगा अगर उनमें लाज बची हो |
👉🏻 सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और संविधान विशेषज्ञ नितिन मेश्राम की हजारों किताबों की शानदार लाइब्रेरी में इस केस का जजमेंट रखा है |
👉🏻 26 जनवरी 2001 को तीन युवक नागपुर में RSS के हेडक्वार्टर पहुंचे | उनके पास भारत का राष्ट्रीय ध्वज था | वे उस बिल्डिंग पर पहली बार राष्ट्रीय झंडा फहराना चाहते थे | वहां मौजूद RSS के बड़े नेताओं ने ऐसा नहीं करने दिया और पुलिस केस कर दिया | उनकी सरकार थी, पुलिस ने झंडा जब्त कर लिया | आखिरकार कोर्ट ने तीनों को बरी कर दिया | सबसे बड़ी बात.... आदेश में दर्ज है कि झंडे को पूरी मर्यादा के साथ हिफाजत में रखा जाए |
👉🏻 इस घटना की शर्म की वजह से अब RSS ने कहीं कहीं राष्ट्रीय झंडा फहराना शुरू कर दिया है |
👉🏻 RSS एक विश्व का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन है । हम OBC, SC, ST, MINORITY तथा अदर गैर मनुवादी भारतीय को आर्थिक + सामाजिक +मानसिक और यहाँ तक की शारीरिक तौर से हिन्दू नाम की चादर ओढ़ाकर गुलाम बना रखा है।
☸ RSS का मकसद तथागत बुद्ध, सम्राट अशोक, ज्योतिबा फूले, पेरियार रामास्वामी नायकर, ललई सिंह यादव, कबीर,  नानक, रविदास, शिवाजी सावित्री बाई फुले, शाहू महाराज, बाबू जगदेव तथा अन्य भारतीय मूल के महापुरुषों के संघर्षो को नेस्तनाबूत करना है ।
👉🏻 RSS संगठन भारत के संविधान को बदल कर अपना मनुवादी संविधान हम भारतीयों पर लागू करके सिर्फ और सिर्फ अपना मनुवादी राज्य निर्मित करना चाहता है |
☸ आओ मूल भारतीयों हम सब साथ मिलकर इस भारत के सबसे बड़े आतंकवादी संगठन *"RSS"* को पूरी तरह जड़ से उखाड़ फेके और इस महान भारतवर्ष की रक्षा करें ।

🙏🏻🙏🏻☸ *जय 💚 भारत* ☸🙏🏻🙏🏻
          ज्यादा से ज्यादा शेयर करें

Wednesday, 12 October 2016

करवाचौथ एक अंधविश्वास

🍂करवाचौथ: एक अन्धविश्वास🍃

करवाचौथ व्रत या पत्नी को गुलामी का अहसास दिलाने का एक और दिन?
'श्रद्धा या अंधविश्वास'
दोस्तों क्या महिला के उपवास रखने से पुरुष की उम्र बढ़ सकती है?
क्या धर्म का कोई ठेकेदार इस बात की गारंटी लेने को तैयार होगा कि करवाचौथ जैसा व्रत करके पति की लंबी उम्र हो जाएगी? मुस्लिम नहीं मनाते, ईसाई नहीं मनाते, दूसरे देश नहीं मनाते और तो और भारत में ही दक्षिण, या पूर्व में नहीं मनाते लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इन तमाम जगहों पर पति की उम्र कम होती हो और मनाने वालों के पति की ज्यादा,
क्यों इसका किसी के पास जवाब नही है?
यह व्रत ज्यादातर उत्तर भारत में प्रचलित हैं, दक्षिण भारत में इसका महत्व ना के बराबर हैं, क्या उत्तर भारत के महिलाओं के पति की उम्र दक्षिण भारत के महिलाओं के पति से कम हैं ?
क्या इस व्रत को रखने से उनके पतियों की उम्र अधिक हो जाएगी?
क्या यह व्रत उनकी परपरागत मजबूरी हैं या यह एक दिन का दिखावा हैं?
दोस्तों इसे अंधविश्वास कहें या आस्था की पराकाष्ठा?
पर सच यह हैं करवाचौथ जैसा व्रत महिलाओं की एक मजबूरी के साथ उनको अंधविश्वास के घेरे में रखे हुए हैं।
कुछ महिलाएँ इसे आपसी प्यार का ठप्पा भी कहेँगी और साथ में यह भी बोलेंगी कि हमारे साथ पति भी यह व्रत रखते हैं। परन्तु अधिकतर महिलाओं ने इस व्रत को मजबूरी बताया हैं।
एक आम वार्तालाप में मैंने खुद कुछ महिलाओं से इस व्रत के बारे में पूछा उनका मानना हैं कि यह पारंपरिक और रूढ़िवादी व्रत है जिसे घर के बड़ो के कहने पर रखना पड़ता हैं क्योंकि कल को यदि उनके पति के साथ संयोग से कुछ हो गया तो उसे हर बात का शिकार बनाया जायेगा,
इसी डर से वह इस व्रत को रखती हैं।
क्या पत्नी के भूखे-प्यासे रहने से पति दीर्घायु स्वस्थ हो सकता है?
इस व्रत की कहानी अंधविश्वासपूर्ण भय उत्पन्न करती है कि करवाचौथ का व्रत न रखने अथवा अज्ञानवश व्रत के खंडित होने से पति के प्राण खतरे में पड़ सकते हैं, यह महिलाओं को अंधविश्वास और आत्मपीड़न की बेड़ियों में जकड़ने को प्रेरित करता है।
कुछ लोग मेरे इस स्टेटस पर इतनी लंबी-चौड़ी बहस करेगे लेकिन एक बार भी नहीं बतायेगे कि, ऐसा क्यों है कि, सारे व्रत-उपवास पत्नी, बहन और माँ के लिए ही क्यों हैं? पति, भाई और पिता के लिए क्यों नहीं.?
क्योंकि धर्म की नज़र मे महिलाओं की जिंदगी की कोई कीमत तो है पत्नी मर जाए तो पुरुष दूसरी शादी कर लेगा, क्योंकि सारी संपत्ति पर तो व्यावहारिक अधिकार उसी को प्राप्त है। बहन, बेटी मर गयी तो दहेज बच जाएगा। बेटी को तो कुल को तारना नहीं है, फिर उसकी चिंता कौन करे?
अगर महिलाओं को आपने सदियों से घरों में क़ैद करके रख के आपने उनकी चिंतन शक्ति को कुंद कर दिया हैं तो क्या अब आपका यह दायित्व नहीं बनता कि, आप पहल करके उन्हें इस मानसिक कुन्दता से आज़ाद करायें?
मैंने कुछ शादीशुदा लोगों से पूछना चाहता हूँ की क्या आज के युग में सब पति पत्निव्रता हैं?
आज की अधिकतर महिलाओं की जिन्दगी घरेलू हिंसा के साथ चल रही हैं जिसमें उनके पतियों का हाथ है।
ऐसी महिलाओं को करवाचौथ का व्रत रखना कैसा रहेगा?
भारत का पुरुष प्रधान समाज केवल नारी से ही सब कुछ उम्मीद करता हैं परन्तु नारी का सम्मान करना कब सोचेगा?
इस व्रत की शैली को बदलना चाहिए जिससे महिलाएँ दिन भर भूखी-प्यासी ना रहे,
एक बात और
मैंने अपनी आँखो से अनेक महिलाओ को करवा चौथ के दिन भी विधवा होते देखा है जबकि वह दिन भर करवा चौथ का उपवास भी किये थी,
दो वर्ष पहले मेरा मित्र जिसकी नई शादी हुई और पहली करवाचौथ के दिन ही घर जाने की जल्दी मे एक सड़क हादसे में उसकी मृत्यु हो गई, उसकी पत्नी अपने पति की दीर्घायु के लिए करवाचौथ का व्रत किए हुए थी, तो क्यों ऐसा हुआ?
करवा चौथ के आधार पर जो समाज मे अंध विश्वास, कुरीति, पाखंड फैला हुआ है, उसको दूर करने के लिए पुरुषों के साथ खासतौर से महिलाए अपनी उर्जा लगाये तो वह ज्यादा बेहतर रहेगा।
मुझे पता है मेरे इस लेख पर कुछ लोग मुझपर ही उँगली उठाएंगे, धर्म विरोधी भी कहेंगे लेकिन मुझे कोई फर्क नही पड़ता,
क्योंकि मैंने सच लिखने की कोशिश की है, मैं हमेशा पाखंड पर चोट करता रहा हूँ और कारता रहूँगा ।
मैं वही लिखता हूँ जो मैं महसूस करता हूँ।
इस सम्बन्ध मे आपसे अनुरोध है की इस पाखंड को खत्म करने मे पुरजोर समर्थन दे।
🙏🏿🙏

ख़बरों की खबर

"ख़बरों की खबर"

ख़बरें
जिन्दगीं के
खतरनाक आयामों से
ख़बरदार करती है !

ख़बरें
गलत रास्तों से
होशियार करती हैं !

ख़बरें
इंसान को बुराइयों से
लड़ने को
तैयार करती हैं !

लेकिन
ख़बरें
जब बाजारूँ हो जाये
तब यह
सत्ता की रखैल बन जाती है
एंकर दलाल हो जाते हैं
रिपोर्टर भड़वे हो जाते हैं
तब
समाचारों से
शिष्टाचार गायब हो जाता है
ख़बर अब खबर नहीं रहती
वो कठपुतली बन जाती है
जिसकी डोर
सत्ता और पूँजीपतियों के हाथों
बेच दी जाती है !

तब

मिडिया के नाम पर
पाखंडों का नंगा नाच चलता है !

ब्रेकिंग न्यूज
बहुत कुछ तोड़ देता है !

प्राइम टाइम में
कुछ भी प्राइम नहीं रह जाता !

एंकर खबरों के नाम पर
मर्सिया गाने लगते है !

रिपोर्टर
दरिंदों के सपोर्टर हो जाते हैं !

टीवी
कैंसर का संक्रमण
फ़ैलाने लगता है !

भूख के सवाल
"सीधी-बात" से हल होते हैं !

गरीबी को
ज्योतिषशास्त्र से
दूर किया जाता है !

बेरोजगारी
कावड़ से दूर होने लगती है !

चीख का सौदा होता है
दर्द की बोली लगती है
राष्ट्रवाद बिकने लगता है
जमीर ,
जमीन पर रौंद दिया जाता है
इंसानियत हैवानियत में
तब्दील हो जाती है
टी आर पी के हिसाब से
नफरतें तय की जाती हैं !

दाढ़ी में आतंक
मूंछों में जाती
कपड़ों में धर्म
और
खाने में अधर्म
की खोज होती है !

पाखंडियों और धूर्तों की
कपटपूर्ण बकवासों में
पूरे दिन की असली ख़बरें
गुम हो जाती है !

मंदिरों के घंटों में
झोपड़ों की चीखें
दबा दी जाती है !

शनि के महात्मय में
गरीबी के पै के लिए
कोई जगह नहीं !

न्याय के नाम पर
अन्याय की मार्केटिंग का
यह धंधा तब तक
चलता रहेगा
जब तक
उधोगपतियों के पैसों पर
यह पलता रहेगा !


पत्रकारिता का यह समूह
लुटेरों का गिरोह बन चुका है !

मिटटी को छोड़
हवा में उड़ चुका है !

अपने कर्तव्यों से
यह कबका फिर चूका है !

लोकतंत का चौथा खम्भा
औंधे मुंह गिर चूका है !
"ख़बरों की खबर"

ख़बरें
जिन्दगीं के
खतरनाक आयामों से
ख़बरदार करती है !

ख़बरें
गलत रास्तों से
होशियार करती हैं !

ख़बरें
इंसान को बुराइयों से
लड़ने को
तैयार करती हैं !

लेकिन
ख़बरें
जब बाजारूँ हो जाये
तब यह
सत्ता की रखैल बन जाती है
एंकर दलाल हो जाते हैं
रिपोर्टर भड़वे हो जाते हैं
तब
समाचारों से
शिष्टाचार गायब हो जाता है
ख़बर अब खबर नहीं रहती
वो कठपुतली बन जाती है
जिसकी डोर
सत्ता और पूँजीपतियों के हाथों
बेच दी जाती है !

तब

मिडिया के नाम पर
पाखंडों का नंगा नाच चलता है !

ब्रेकिंग न्यूज
बहुत कुछ तोड़ देता है !

प्राइम टाइम में
कुछ भी प्राइम नहीं रह जाता !

एंकर खबरों के नाम पर
मर्सिया गाने लगते है !

रिपोर्टर
दरिंदों के सपोर्टर हो जाते हैं !

टीवी
कैंसर का संक्रमण
फ़ैलाने लगता है !

भूख के सवाल
"सीधी-बात" से हल होते हैं !

गरीबी को
ज्योतिषशास्त्र से
दूर किया जाता है !

बेरोजगारी
कावड़ से दूर होने लगती है !

चीख का सौदा होता है
दर्द की बोली लगती है
राष्ट्रवाद बिकने लगता है
जमीर ,
जमीन पर रौंद दिया जाता है
इंसानियत हैवानियत में
तब्दील हो जाती है
टी आर पी के हिसाब से
नफरतें तय की जाती हैं !

दाढ़ी में आतंक
मूंछों में जाती
कपड़ों में धर्म
और
खाने में अधर्म
की खोज होती है !

पाखंडियों और धूर्तों की
कपटपूर्ण बकवासों में
पूरे दिन की असली ख़बरें
गुम हो जाती है !

मंदिरों के घंटों में
झोपड़ों की चीखें
दबा दी जाती है !

शनि के महात्मय में
गरीबी के पै के लिए
कोई जगह नहीं !

न्याय के नाम पर
अन्याय की मार्केटिंग का
यह धंधा तब तक
चलता रहेगा
जब तक
उधोगपतियों के पैसों पर
यह पलता रहेगा !


पत्रकारिता का यह समूह
लुटेरों का गिरोह बन चुका है !

मिटटी को छोड़
हवा में उड़ चुका है !

अपने कर्तव्यों से
यह कबका फिर चूका है !

लोकतंत का चौथा खम्भा
औंधे मुंह गिर चूका है !

आरक्षण के बारे में

मेरठ। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज ने जाति आधारित आरक्षण खत्म करने की मांग की है। उत्तर प्रदेश ब्राह्मण महासभा ने रविवार को मेरठ में सवर्ण समाज महासम्मेलन में जाति आधारित आरक्षण खत्म करने और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू किये जाने की माँग की।

http://www.nationaldastak.com/story/view/brahmins-again-talking-about-reservation-on-the-basis-of--economical-condition-

ब्राह्मण जाति आधारित आरक्षण को ही खत्म करने कि बात करते हैं

कभी भी जातियों को खत्म करने कि बात नहीं करते

जाति आधारित संगठनों को यह लोग बढावा देते हैं
अपने ब्राह्मणवादी मिडिया दवारा जाति आधारित संगठन का प्रचार प्रसार करते हैं
नेताओं से उस जातिगत संगठन को डोनेशन देते हैं
ताकि जातियाँ मजबूत हो सके
जातियाँ मजबूत होगी
तो ब्राह्मणवाद मजबूत होगा
लोग जातियों में बंट कर अपनी न्याय कि  लड़ाई अलग अलग लडेगें
तो यह सब को अलग अलग करके मारेगें
अत्याचार करेगें
सबको तोड कर खुद राज करेगें
और किसी को भी जीवन जीने नहीं देगें
सबको रोटी कपड़ा मकान में उलझा कर रखेंगे
हमारे लोगों को संस्कृत पढायेगें
इनके बच्चों को प्राइवेट स्कुलों में
कान्वेंट में अंगेजी शिक्षा देगें

साथियों ऐसा नहीं है कि यह जातिगत आधार पर आरक्षण को खत्म करने कि मांग कर रहें हैं

और आर्थिक आधार लाना चाहते हैं
यह एक षडयंत्र के तहत हो रहा है

हमारे लोगों का ध्यान भटका कर यह लोग हमें माञ आरक्षण कि लड़ाई में ही लगाना चाहते हैं
जबकि एक तरफ
इन्होंने
निजीकरण के माध्यम से
ठैका प्रथा के माध्यम से
पीपीपी मोड के माध्यम से
बैकलॉग खत्म करके
प्रमोशन में आरक्षण को न्यायपालिका के माध्यम से खत्म करके
उच्च शिक्षा
जैसे
मेडिकल
इंजिनियरिंग
MBA
PHD
लगभग सभी का निजिकरण करके मेनेजमेंट कोटे से मतलब पैसे से
सारा का सारा
प्रतिनिधित्व (आरक्षण ) खत्म कर दिया है
साथियों आरक्षण कोई खैरात नहीं है
यह संवैधानिक अधिकार है
जो शासन प्रशासन में हमारे लोगों कि
वंचित समाज कि
पिछड़ों कि
जनसंख्या के हिसाब से भागीदारी है
इसका आधार
गरीबी नहीं है
इसका आधार आर्थिक नहीं है

इसका आधार है
1)सामाजिक और
 2)शैक्षणिक पिछड़ापन

यह गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है
उदाहरण के रूप में एक बाप के चार बेटे हैं
और उसके पास चार बिघा जमीन है

तो वह बाप कि बेटों के लिए एक एक बिघा हिस्सेदारी है
इसी तरह हमारी भारत में जनसंख्या के हिसाब से शासन प्रशासन में हिस्सेदारी है

साथियों बार बार आरक्षण का नाम लेकर
जातिगत आरक्षण को खत्म करने का नाम लेकर हमें गुमराह किया जा रहा है

हकिकत में
हमारे लोगों को माञ 49% प्रतिशत में समेट दिया गया है
15% लोग 51% आरक्षण का फायदा ले रहें हैं

आप लोगों नें आये दिनों में पढा होगा कि
ओबीसी कि मेरीट
जनरल से ऊपर जा रही है
परन्तु ओबीसी का वह केंडिडेट  सामान्य से ऊपर नम्बर ला रहा है
उसको रोस्टर रूल के तहत
उनको 51% अनारक्षित कोटे में जाना चाहिए था
परन्तु उसको आरक्षित कोटे में ही रखा जा रहा है
इसका मतलब यह हुआ कि हमारे लोगों को जो सामान्य से ज्यादा नम्बर ला रहें हैं
उनकों अगर अनारक्षित कोटे में नहीं लिया जा रहा है
इसका सिधा मतलब यह है कि
हमारे लोगों को ही नुकसान हो रहा है
और यह15% लोग सिधा सिधा 51% आरक्षण ले रहें हैं

इसलिए यह एक षडयंत्र के रूप में हैं
समझने विचार करने कि जरूरत है
समाज को आरक्षण (प्रतिनिधित्व ) क्या है
उसका मतलब बताने कि जरूरत है
संविधान के आर्टिकल 340 341 व 342 क्या है
आरक्षण का आधार क्या है
रोस्टर रूल क्या है
इसका प्रचार प्रसार करने कि जरूरत है
हमारे समाज को जानकार बनाने कि जरूरत है
ताकि वो संवैधानिक हकों कि रक्षा कर सके

Tuesday, 11 October 2016

Who is reponsible of 2000 years slavery?

The country's 2,000 years of slavery of the blame?
Bhante Sumedhanand sermon was once a gathering, the gathering of the Buddhist Dhamma a Brahmin's voice echoed throughout the country because of the slave was born. Bhante then asked him Brahmin -
Srmn- O Brahmin! You say that your country became a slave of the Buddhist Dhamma.
Brahmin - yes Bhante! Buddhist Dhamma because my country became a slave.
Shramana - O Brahmin! When was the Buddha Dhamma in India?
Brahmin - O Bhante! About 2530 years ago.
Shramana - O Brahmin! Dhamma Buddhist empire in India was how long?
Brahmin - O Bhante! Until 2200 years.
Shramana - O Brahmin! The 320 years between India captive to a foreign king.
Brahmin - Bhante not.
Shramana - O Brahmin! Who was the last emperor of the Buddhist Dhamma?
Brahmin - O Bhante! Brihadratha emperor.
Shramana - O Brahmin! When the empire was Brihadratha.
Brahmin - O Bhante! Until 2200 years.
Shramana - O Brahmin! Brihadratha were killed by whom?
Brahmin - O Bhante! Sunga Pushpmitr Brihadratha by the commander.
Shramana - O Brahmin! India Brahmin Pushpmitr Sung after capturing what was announced?
Brahmin - O Bhante! The heads of the mighty and bring the Buddhists, the more money will be given to him.
Shramana - O Brahmin! Sunga Pushpmitr legislation which was created after the empire?
Brahmin - O shramana! Sumit Bhargava 2176 years ago was created by Manu.
Shramana - O Brahmin! What has been the creation of legislation that Manu who?
Brahmin - Hey Randy! Thousands of Indian society into castes Manu legislation by distributing the country's unity and strength was incised, and untouchability Oocnic state was established, the Indian people were jealous of each other, all except just the few warrior class India bans on people to take up arms, to take revenge from the other Indian people invitation for foreign people started to attack India.
Shramana - O Brahmin! The polity of the country due to the Buddha's Dhamma or righteousness Brahmin.
Brahmin - O Bhante! The Brahmin.
Shramana - O Brahmin! Century Buddhist Dhamma which was on the verge of completion?
Brahmin - O Bhante! Around the 7th century.
Shramana - O Brahmin! What's your shankaracharyas century Buddhist Dhamma announced that India was free?
Brahmin - O Bhante! In the 8th century.
Shramana - O Brahmin! Muhammad bin Qasim in 712 AD when the Emperor Dahir invaded, the emperor Dahir of losing what was the reason?
Brahmin - O shramana! Qasim said that if a Brahmin temple of the goddess, when he dropped the flag will be part Dahir army. Brahmani superstition was that the army ran away and we lost. Thus the foundation of slavery in India in the year 712 by a Brahmin because of treason laid.
Shramana - O Brahmin! After the 7th century by Mahmud Ghazni Somnath looted, whose power in the country was
Brahmin - O shramana! Brahmin religion.
Shramana - O Brahmin! Mahmud Ghazni when a million women in detention in India for his harem took their land, and whose power was in India?
Brahmin - O shramana! Brahmin religion.
Shramana - O Brahmin! Dhaba at the main gate of the fortress of Somnath Mahmood said the army was doing the Brahmin?
Brahmin - O shramana! Sitting on the walls of the fortress troops was pleased with the idea that Muslims still daring few minutes we will be destroyed by God.
Shramana - O Brahmin! In 1562, the year that the Jaipur ruler Bihari Mal Anvr Akbar did before?
Brahmin - O Bhante! King without a sword and shield raised Bihari Mal succumbed Akbar and his daughter was married to him, too.
Shramana - O Brahmin! Ranthambhore, Marwar, Bikaner, Jodhpur and Jaisalmer Akbar before kings did?
Brahmin - O Bhante! By surrender their unmarried girls proceeded to hand over to Akbar's harem.
Shramana - O Brahmin! When Guru Gobind Singh and Shivaji were fighting the Mughals in Punjab and Maharashtra respectively, the Brahmin's army was doing?
Brahmin - O shramana! Rajputs, Marathas and other Indian blood thirsty king Shivaji and Guru Gobind Singh were made.
Shramana - O Brahmin! Maharana Pratap had fought all his life through which the kings?
Brahmin - O Bhante! Ghulam Akbar Indian kings.
Shramana - O Brahmin! Rana Sanga who invaded India to be invited?
Brahmin - O Bhante! Beaver invited.
Shramana - O wise Brahmin! We Indians have become so impotent, how?
Brahmin - O Bhante! Brahmanical religion, karma, luck and principles Brhmsaty made impotent the Indian people.
Shramana - O wise Brahmin! Now tell your country or Brahmanical religion of slaves because of the Buddha's Dhamma.
Brahmin - O shramana! The Brahmanical religion .. 

रावण का ही दहन क्यों?

_*रावण का ही दहन क्यो?*
__इन्द्रदेव ने ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या के साथ बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__राजा पाण्डु ने माधुरी के साथ बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__पराशर ऋषि ने केवट की लड़की सत्यवती के साथ बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__बृहस्पति की पत्नी तारा का चन्द्र ने अपहरण करके बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__ब्रह्मा ने अपनी पुत्री सरस्वती के साथ जबरदस्ती वर्षो तक बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही??
__राजा नरक की रानियों के साथ कृष्ण ने जबरदस्ती सहवास/विवाह रचाया उसका दहन क्यो नही?
__कृष्ण ने अपने मामा रामण की पत्नी के साथ खुल्लम खुल्ला अवैध सम्बन्ध बनाया उसका दहन क्यो नही?
__भीष्म ने अम्बा;अम्बीका; अम्बालिका का अपहरण किया उसका दहन क्यो नही?
__राम के पूर्वज राजा दण्ड ने शुक्राचार्य की पुत्री अरजा के साथ बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__वायु देवता ने राजर्षि कुशनाश की कन्याओं के साथ बलात्कार करने कि कोशिश की उसका दहन क्यो नही?
__वीष्णु ने जालन्घर की पत्नी वृन्दा के साथ बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__आज बलात्कार इसीलिए तो नहीं रूक रहा है क्योकि हम बलात्कारियों की पूजा करते है;और जिस रावण ने अपनी बहन का बदला लेने के लिए सीता को ले गया पर उसे छुआ तक नहीं उसे सम्मान पूर्वक संभाला उस रावण को जलाते हैं!_

क्रांति की वजह

*यह पोस्ट,   अनु- सूचित जाति या जन- जाति   से सम्बन्धित  लोगो के लिए  पढना मैनडेटरी  है । क्योंकि   इस  ब्राह्मणवाद   को खत्म करने  के  लिए  यह  जानना जरूरी  है कि  ब्राह्मणवादी लोगों ने  इस  वर्ण  पर   क्या क्या  अत्याचार  किए थे।  जान कर आपके रोंगटे  खड़े हो जाएंगे।  इस   देश मे अंग्रेजी    शासन   नही   आता    तो    अनुमान    नही लगा    सकते  आज  क्या    हालत   होती । वैसे   अभी  भी   कोई   कसर   बाकि नही है।    आप      से   करबद्ध  अनुरोध  है  कि आप को   जब   भी  समय मिले   तो  यह   पोस्ट  जरूर जरुर  पढे ।*
🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

अंग्रेजों ने भारत पर 150 वर्षों तक राज किया ब्राह्मणों ने उनको भगाने का हथियार बन्द
आंदोलन क्यों चलाया?
जबकि भारत पर सबसे पहले हमला मुस्लिम
शासक मीर काशीम ने 712 ई. में किया! उसके बाद महमूद   गजनबी, मोहमंद गौरी, चन्गेज खान ने हमला किए और फिर  कुतुबदीन   एबक, गुलामवंश, तुगलकवंश, खिलजीवंश, लोदीवंश
फिर मुगल आदि वन्शो
ने भारत पर राज किया
और   खूब    अत्याचार
किए  लेकिन ब्राह्मण ने
कोई क्रांति या आंदोलन
नही चलाया ! फिर
अन्ग्रेजो के खिलाफ़ ही
क्यों क्रांति कर दी ।

*जानिये  क्रांति   और  आंदोलन की वजह ।*

1- अंग्रेजो  ने    1795
में अधिनयम 11  द्वारा
शुद्रों  को   भी    सम्पत्ति
रखने का कानून बनाया।

2- 1773 में ईस्ट इंडिया
कम्पनी ने रेगुलेटिग एक्ट पास किया जिसमें न्याय
व्यवस्था समानता    पर
आधारित थी ।  ।6 मई 1775 को  इसी  कानून द्वारा बंगाल के सामन्त ब्राह्मण  नन्द कुमार देव को फांसी हुई थी ।

3- 1804 अधिनीयम 3 द्वारा   कन्या  हत्या   पर रोक   अंग्रेजों  ने  लगाई (लडकियों के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपकाकर, माँ के
स्तन पर धतूरे का
लेप लगाकर, एवम्
गढ्ढा बनाकर उसमें दूध डालकर डुबो कर मारा जाता था ।

4- 1813 में ब्रिटिश सरकार ने कानून बनाकर शिक्षा ग्रहण करने का सभी जातियों और धर्मों के लोगों को अधिकार दिया।

5- 1813 में  ने दास प्रथा का अंत कानून बनाकर किया।

6-  1817  में     समान नागरिक संहिता कानून बनाया ।   1817    के पहले सजा का प्रावधान वर्ण के आधार पर था। ब्राह्मण को कोई   सजा नही होती थी ओर   शुद्र को   कठोर   दंड   दिया
जाता था। अंग्रेजो      ने सजा का प्रावधान समान कर दिया।

7- *1819 में अधि- नियम  नम्बर  7 द्वारा ब्राह्मणों  द्वारा    शुद्र  स्त्रियों के शुद्धिकरण पर रोक लगाई।*  (शुद्रों की शादी होने पर दुल्हन को अपने यानि दूल्हे  के घर न जाकर कम से कम तीन रात  ब्राह्मण के घर शारीरिक   सेवा देनी पड़ती थी।)

8- *1830 नरबलि प्रथा पर रोक -* (देवी देवता को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मण शुद्रों,  स्त्री   व् पुरुष दोनों को मन्दिर
में सिर पटक पटक कर
चढ़ा देता था। )

9- 1833   अधिनियम 87 द्वारा सरकारी सेवा में भेद भाव   पर   रोक अर्थात  योग्यता ही सेवा का  आधार     स्वीकार किया गया तथा कम्पनी केअधीन किसी भारतीय
नागरिक     को     जन्म स्थान, धर्म, जाति या रंग के आधार   पर   पद  से वंचित  नही   रखा    जा सकता है।

10- 1834  में   पहला भारतीय  विधि  आयोग का गठन हुआ । कानून
बनाने   की     व्यवस्था जाति,  वर्ण,  धर्म  और क्षेत्र की भावना से ऊपर उठकर  करना   आयोग का प्रमुख उद्देश्य था।

11-  *1835  प्रथम  पुत्र को गंगा दान पर रोक !*   (ब्राह्मणों ने नियम बनाया  की शुद्रों के घर यदि पहला बच्चा लड़का पैदा हो तो  उसे गंगा में फेंकदेना चाहिये।
पहला पुत्र ह्रष्ट-पृष्ट एवं
स्वस्थ पैदा होता है।यह
बच्चा ब्राह्मणों से लड़ न
पाए इसलिए पैदा होते ही गंगा को दान करवा देते थे। )

12- 7 मार्च 1835 को
लार्ड मैकाले ने   शिक्षा
नीति राज्य  का  विषय
बनाया और उच्च शिक्षा
को   अंग्रेजी   भाषा का
माध्यम  बनाया  गया।

13- 1835 को कानून बनाकर अंग्रेजों ने शुद्रों को कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया।

14- दिसम्बर 1829 के
नियम 17 द्वारा विधवाओं को जलाना अवैध घोषित कर सती प्रथा का अंत किया।

15- देवदासी   प्रथा पर
रोक लगाई। ब्राह्मणों के
कहने   से  शुद्र   अपनी
लडकियों को मन्दिर की
 सेवा के लिए  दान  देते थे। मन्दिर  के   पुजारी उनका शारीरिक शोषण करते थे। बच्चा पैदा होने पर उसे  फेंक देते थे।और उस बच्चे को हरिजन नाम  देते थे।
1921 को जातिवार जनगणना के आंकड़े के अनुसार अकेले मद्रास में कुल जनसंख्या 4 करोड़
 23 लाख थी जिसमें 2
लाख देवदासियां मन्दिरों में पड़ी थी।  यह प्रथा अभी भी दक्षिण भारत के मन्दिरो  में  चल रही है।

16- 1837 अधिनियम द्वारा ठगी प्रथा का अंत किया।

17- 1849 में कलकत्ता
 में एक बालिका विद्यालय जे ई डी बेटन ने स्थापित  किया।

18-  1854 में अंग्रेजों ने  3 विश्वविद्यालय कलकत्ता मद्रास और बॉम्बे में स्थापित किये। 1902 मे विश्वविद्यालय आयोग   नियुक्त किया गया।

19- 6 अक्टूबर 1860
को अंग्रेजों  ने  इंडियन
पीनल    कोड  बनाया।
लार्ड मैकाले ने सदियों
से  जकड़े   शुद्रों    की
जंजीरों  को  काट दिया
ओर भारत में जाति, वर्ण और धर्म के बिना  एक
समान   क्रिमिनल   लॉ
लागु कर दिया।

20- 1863 अंग्रेजों   ने कानून बनाकर   चरक पूजा पर रोक लगा दिया (आलिशान भवन एवं पुल निर्माण पर शुद्रों को
पकड़कर जिन्दा चुनवा
दिया जाता था इस पूजा
में मान्यता थी की भवन
और पुल ज्यादा दिनों
तक  टिकाऊ  रहेगें।

21- 1867 में  बहू विवाह प्रथा पर पुरे देश में  प्रतिबन्ध लगाने के
उद्देश्य से बंगाल सरकार
ने एक कमेटी गठित किया ।

22- 1871 में अंग्रेजों ने भारत में जातिवार गणना प्रारम्भ की। यह जनगणना 1941 तक हुई । 1948 में पण्डित नेहरू ने कानून बनाकर जातिवार गणना पर रोक लगा दी।

23- 1872 में सिविल
मैरिज एक्ट द्वारा 14
वर्ष से कम आयु की कन्याओं एवम् 18 वर्ष से कम आयु के लड़को
का विवाह वर्जित करके
बाल  विवाह  पर   रोक
लगाई।

24- अंग्रेजों ने महार और चमार रेजिमेंट बनाकर इन जातियों को सेना में  भर्ती किया लेकिन 1892  में ब्राह्मणों के दबाव के कारण सेना में अछूतों की भर्ती बन्द हो गयी।

25- रैयत वाणी पद्धति अंग्रेजों    ने    बनाकर प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार को  भूमि का स्वामी स्वीकार  किया।

26- 1918 में साऊथ
बरो कमेटी को भारत मे
अंग्रेजों ने भेजा ।   यह कमेटी भारत में   सभी जातियों का विधि
मण्डल (कानून बनाने
की संस्था) में भागीदारी
के लिए आया था। शाहू
जी महाराज   के  कहने पर  पिछङो    के   नेता भाष्कर   राव जाधव ने एवम् अछूतों के नेता डा
अम्बेडकर ने   अपने लोगों को विधि मण्डल में  भागीदारी के लिये
मेमोरेंडम दिया।

27- अंग्रेजो ने 1919 में भारत सरकार अधिनियम का गठन किया ।

28- 1919 में अंग्रेजो ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थीऔर
कहा था की इनके अंदर
न्यायिक चरित्र नही होता है।

29- 25 दिसम्बर1927
को डा अम्बेडकर द्वारा
मनु समृति का दहन किया। मनु स्मृति में
शूद्रों और   महिलाओं   को गुलाम   तथा  भोग  की वस्तु समझा जाता था एक  पुरूष   को अनगिनत  शादियां करने का धार्मिक अधिकार है। महिला अधिकार विहीन तथा दासी की स्थिति में थी। एक - एक औरत के अनगिनत  सौतने   हुआ करती थी   औरतो- शूद्रों को सिर्फ   और    सिर्फ गुलामी लिखा है जिसको एक  राक्षस मनु  ने  धर्म का नाम दिया है।

30- 1 मार्च 1930 को
डा अम्बेडकर द्वारा काला राम मन्दिर (नासिक)  प्रवेश का आंदोलन  चलाया।

31- 1927 को अंग्रेजों ने कानून बनाकर शुद्रों के सार्वजनिक स्थानों पर जाने का अधिकार दिया।

32- नवम्बर 1927   में साइमन   कमीशन   की नियुक्ति की। जो 1928 में भारत के अछूत लोगों की  स्थिति का सर्वे करने और उनको अतिरिक्त अधिकार देने के लिए आया। भारत के लोगों को अंग्रेज अधिकार न दे सके इसलिए इस कमीशन के भारत पहुँचते ही गांधी और लाला लाजपत राॅय ने इस कमीशनके विरोध में बहुत बड़ा आंदोलन चलाया। जिस कारण
साइमन कमीशन अधूरी
रिपोर्ट लेकर वापस
चला गया। इस पर
अंतिम फैसले के लिए
अंग्रेजों ने भारतीय
प्रतिनिधियों को 12
नवम्बर 1930 को लन्दन गोलमेज सम्मेलन में  बुलाया।

33- 24 सितम्बर 1932 को अंग्रेजों ने कम्युनल
अवार्ड घोषित किया
जिसमें प्रमुख अधिकार
निम्न दिए----

A--वयस्क मताधिकार

B--विधान मण्डलों और
संघीय सरकार में जन संख्या   के  अनुपात
में अछूतों को आरक्षण
का अधिकार

C--सिक्ख, ईसाई और मुसलमानों की तरह अछूतों (SC/ST )को  भी स्वतन्त्र निर्वाचन के क्षेत्र का अधिकार मिला। जिन क्षेत्रों में अछूत प्रतिनिधिखड़े होंगे उनका चुनाव केवल अछूत ही करेगें।

D--प्रतिनिधियोंको चुनने के लिए दो बार वोट का
अधिकार मिला  जिसमें
एक   बार  सिर्फ  अपने
प्रतिनिधियों को वोट देंगे
दूसरी   बार    सामान्य
प्रतिनिधियों   को   वोट देगे।

34- 19 मार्च 1928 को बेगारी प्रथा के विरुद्ध डा अम्बेडकर ने मुम्बई
विधान परिषद मेंआवाज
उठाई , जिसके बाद
अंग्रेजों ने इस प्रथा को
समाप्त कर दिया।

35- अंग्रेजों ने 1 जुलाई 1942 से लेकर 10 सितम्बर 1946 तक डाॅ अम्बेडकर को वायसराय की कार्य साधक कौंसिल में   लेबर   मेंबर बनाया। लेबरो को डा अम्बेडकर ने 8.3 प्रतिशत आरक्षण दिलवाया।

36-- 1937 में अंग्रेजों
ने भारत में प्रोविंशियल गवर्नमेंट   का    चुनाव करवाया।

37-- 1942 में अंग्रेजों
से डा. अम्बेडकर ने 50
हजार हेक्टेयर भूमि को
अछूतों एवम् पिछङो में
बाट देने के लिए अपील
किया ।  अंग्रेजों ने 20 वर्षों की समय सीमा तय किया था।

38- अंग्रेजों   ने  शासन प्रसासन में ब्राह्मणों  की भागीदारी को 100% से 2.5% पर लाकर खड़ा
कर दिया था।

इन्ही सब वजाह से ब्राह्मणों  ने अन्ग्रेजो के खिलाफ़  क्रांति शुरू कर दी क्योकि  अन्ग्रेजो  ने शुद्रो और महिलाओं को सारे अधिकार दे दिये थे और  सब जातियो के लोगो को एक समान अधिकार देकर सबको बराबरी मे लाकर खडा किया
   ☸जय भीम ☸
जनजागरण  हेतु  ज्यादा से ज्यादा ग्रुपों में शेयर करो  ताकि  ज्यादा से ज्यादा  अनुसूचित जाति और जनजाति  के भाई लोग अपना  ज्ञानवर्धन कर सकें । पढेंगे   तभी तो जानेंगे ।  इज्जत  से जीना चाहते  हो तो  देश से पाखण्ड वाद  हटाओ देश      की   अखण्डता बचाओ    पाखण्ड  मुक्त  भारत बनाओ ।

*यह सब जानकर अगर आप समझते  हैं कि मैने आपका समय व्यर्थ  किया तो माफी चाहता हूँ
🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

मूलनिवासी इतिहास

sir Manohar barkade ji ki wall se मूलनिवासी इतिहास *ये है भारत का असली इतिहासl बाकि सब झूठ हैl* इस पोस्ट के अन्दर दबे हुए इतिहास के प...