Wednesday, 12 October 2016

ख़बरों की खबर

"ख़बरों की खबर"

ख़बरें
जिन्दगीं के
खतरनाक आयामों से
ख़बरदार करती है !

ख़बरें
गलत रास्तों से
होशियार करती हैं !

ख़बरें
इंसान को बुराइयों से
लड़ने को
तैयार करती हैं !

लेकिन
ख़बरें
जब बाजारूँ हो जाये
तब यह
सत्ता की रखैल बन जाती है
एंकर दलाल हो जाते हैं
रिपोर्टर भड़वे हो जाते हैं
तब
समाचारों से
शिष्टाचार गायब हो जाता है
ख़बर अब खबर नहीं रहती
वो कठपुतली बन जाती है
जिसकी डोर
सत्ता और पूँजीपतियों के हाथों
बेच दी जाती है !

तब

मिडिया के नाम पर
पाखंडों का नंगा नाच चलता है !

ब्रेकिंग न्यूज
बहुत कुछ तोड़ देता है !

प्राइम टाइम में
कुछ भी प्राइम नहीं रह जाता !

एंकर खबरों के नाम पर
मर्सिया गाने लगते है !

रिपोर्टर
दरिंदों के सपोर्टर हो जाते हैं !

टीवी
कैंसर का संक्रमण
फ़ैलाने लगता है !

भूख के सवाल
"सीधी-बात" से हल होते हैं !

गरीबी को
ज्योतिषशास्त्र से
दूर किया जाता है !

बेरोजगारी
कावड़ से दूर होने लगती है !

चीख का सौदा होता है
दर्द की बोली लगती है
राष्ट्रवाद बिकने लगता है
जमीर ,
जमीन पर रौंद दिया जाता है
इंसानियत हैवानियत में
तब्दील हो जाती है
टी आर पी के हिसाब से
नफरतें तय की जाती हैं !

दाढ़ी में आतंक
मूंछों में जाती
कपड़ों में धर्म
और
खाने में अधर्म
की खोज होती है !

पाखंडियों और धूर्तों की
कपटपूर्ण बकवासों में
पूरे दिन की असली ख़बरें
गुम हो जाती है !

मंदिरों के घंटों में
झोपड़ों की चीखें
दबा दी जाती है !

शनि के महात्मय में
गरीबी के पै के लिए
कोई जगह नहीं !

न्याय के नाम पर
अन्याय की मार्केटिंग का
यह धंधा तब तक
चलता रहेगा
जब तक
उधोगपतियों के पैसों पर
यह पलता रहेगा !


पत्रकारिता का यह समूह
लुटेरों का गिरोह बन चुका है !

मिटटी को छोड़
हवा में उड़ चुका है !

अपने कर्तव्यों से
यह कबका फिर चूका है !

लोकतंत का चौथा खम्भा
औंधे मुंह गिर चूका है !
"ख़बरों की खबर"

ख़बरें
जिन्दगीं के
खतरनाक आयामों से
ख़बरदार करती है !

ख़बरें
गलत रास्तों से
होशियार करती हैं !

ख़बरें
इंसान को बुराइयों से
लड़ने को
तैयार करती हैं !

लेकिन
ख़बरें
जब बाजारूँ हो जाये
तब यह
सत्ता की रखैल बन जाती है
एंकर दलाल हो जाते हैं
रिपोर्टर भड़वे हो जाते हैं
तब
समाचारों से
शिष्टाचार गायब हो जाता है
ख़बर अब खबर नहीं रहती
वो कठपुतली बन जाती है
जिसकी डोर
सत्ता और पूँजीपतियों के हाथों
बेच दी जाती है !

तब

मिडिया के नाम पर
पाखंडों का नंगा नाच चलता है !

ब्रेकिंग न्यूज
बहुत कुछ तोड़ देता है !

प्राइम टाइम में
कुछ भी प्राइम नहीं रह जाता !

एंकर खबरों के नाम पर
मर्सिया गाने लगते है !

रिपोर्टर
दरिंदों के सपोर्टर हो जाते हैं !

टीवी
कैंसर का संक्रमण
फ़ैलाने लगता है !

भूख के सवाल
"सीधी-बात" से हल होते हैं !

गरीबी को
ज्योतिषशास्त्र से
दूर किया जाता है !

बेरोजगारी
कावड़ से दूर होने लगती है !

चीख का सौदा होता है
दर्द की बोली लगती है
राष्ट्रवाद बिकने लगता है
जमीर ,
जमीन पर रौंद दिया जाता है
इंसानियत हैवानियत में
तब्दील हो जाती है
टी आर पी के हिसाब से
नफरतें तय की जाती हैं !

दाढ़ी में आतंक
मूंछों में जाती
कपड़ों में धर्म
और
खाने में अधर्म
की खोज होती है !

पाखंडियों और धूर्तों की
कपटपूर्ण बकवासों में
पूरे दिन की असली ख़बरें
गुम हो जाती है !

मंदिरों के घंटों में
झोपड़ों की चीखें
दबा दी जाती है !

शनि के महात्मय में
गरीबी के पै के लिए
कोई जगह नहीं !

न्याय के नाम पर
अन्याय की मार्केटिंग का
यह धंधा तब तक
चलता रहेगा
जब तक
उधोगपतियों के पैसों पर
यह पलता रहेगा !


पत्रकारिता का यह समूह
लुटेरों का गिरोह बन चुका है !

मिटटी को छोड़
हवा में उड़ चुका है !

अपने कर्तव्यों से
यह कबका फिर चूका है !

लोकतंत का चौथा खम्भा
औंधे मुंह गिर चूका है !

आरक्षण के बारे में

मेरठ। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज ने जाति आधारित आरक्षण खत्म करने की मांग की है। उत्तर प्रदेश ब्राह्मण महासभा ने रविवार को मेरठ में सवर्ण समाज महासम्मेलन में जाति आधारित आरक्षण खत्म करने और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू किये जाने की माँग की।

http://www.nationaldastak.com/story/view/brahmins-again-talking-about-reservation-on-the-basis-of--economical-condition-

ब्राह्मण जाति आधारित आरक्षण को ही खत्म करने कि बात करते हैं

कभी भी जातियों को खत्म करने कि बात नहीं करते

जाति आधारित संगठनों को यह लोग बढावा देते हैं
अपने ब्राह्मणवादी मिडिया दवारा जाति आधारित संगठन का प्रचार प्रसार करते हैं
नेताओं से उस जातिगत संगठन को डोनेशन देते हैं
ताकि जातियाँ मजबूत हो सके
जातियाँ मजबूत होगी
तो ब्राह्मणवाद मजबूत होगा
लोग जातियों में बंट कर अपनी न्याय कि  लड़ाई अलग अलग लडेगें
तो यह सब को अलग अलग करके मारेगें
अत्याचार करेगें
सबको तोड कर खुद राज करेगें
और किसी को भी जीवन जीने नहीं देगें
सबको रोटी कपड़ा मकान में उलझा कर रखेंगे
हमारे लोगों को संस्कृत पढायेगें
इनके बच्चों को प्राइवेट स्कुलों में
कान्वेंट में अंगेजी शिक्षा देगें

साथियों ऐसा नहीं है कि यह जातिगत आधार पर आरक्षण को खत्म करने कि मांग कर रहें हैं

और आर्थिक आधार लाना चाहते हैं
यह एक षडयंत्र के तहत हो रहा है

हमारे लोगों का ध्यान भटका कर यह लोग हमें माञ आरक्षण कि लड़ाई में ही लगाना चाहते हैं
जबकि एक तरफ
इन्होंने
निजीकरण के माध्यम से
ठैका प्रथा के माध्यम से
पीपीपी मोड के माध्यम से
बैकलॉग खत्म करके
प्रमोशन में आरक्षण को न्यायपालिका के माध्यम से खत्म करके
उच्च शिक्षा
जैसे
मेडिकल
इंजिनियरिंग
MBA
PHD
लगभग सभी का निजिकरण करके मेनेजमेंट कोटे से मतलब पैसे से
सारा का सारा
प्रतिनिधित्व (आरक्षण ) खत्म कर दिया है
साथियों आरक्षण कोई खैरात नहीं है
यह संवैधानिक अधिकार है
जो शासन प्रशासन में हमारे लोगों कि
वंचित समाज कि
पिछड़ों कि
जनसंख्या के हिसाब से भागीदारी है
इसका आधार
गरीबी नहीं है
इसका आधार आर्थिक नहीं है

इसका आधार है
1)सामाजिक और
 2)शैक्षणिक पिछड़ापन

यह गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है
उदाहरण के रूप में एक बाप के चार बेटे हैं
और उसके पास चार बिघा जमीन है

तो वह बाप कि बेटों के लिए एक एक बिघा हिस्सेदारी है
इसी तरह हमारी भारत में जनसंख्या के हिसाब से शासन प्रशासन में हिस्सेदारी है

साथियों बार बार आरक्षण का नाम लेकर
जातिगत आरक्षण को खत्म करने का नाम लेकर हमें गुमराह किया जा रहा है

हकिकत में
हमारे लोगों को माञ 49% प्रतिशत में समेट दिया गया है
15% लोग 51% आरक्षण का फायदा ले रहें हैं

आप लोगों नें आये दिनों में पढा होगा कि
ओबीसी कि मेरीट
जनरल से ऊपर जा रही है
परन्तु ओबीसी का वह केंडिडेट  सामान्य से ऊपर नम्बर ला रहा है
उसको रोस्टर रूल के तहत
उनको 51% अनारक्षित कोटे में जाना चाहिए था
परन्तु उसको आरक्षित कोटे में ही रखा जा रहा है
इसका मतलब यह हुआ कि हमारे लोगों को जो सामान्य से ज्यादा नम्बर ला रहें हैं
उनकों अगर अनारक्षित कोटे में नहीं लिया जा रहा है
इसका सिधा मतलब यह है कि
हमारे लोगों को ही नुकसान हो रहा है
और यह15% लोग सिधा सिधा 51% आरक्षण ले रहें हैं

इसलिए यह एक षडयंत्र के रूप में हैं
समझने विचार करने कि जरूरत है
समाज को आरक्षण (प्रतिनिधित्व ) क्या है
उसका मतलब बताने कि जरूरत है
संविधान के आर्टिकल 340 341 व 342 क्या है
आरक्षण का आधार क्या है
रोस्टर रूल क्या है
इसका प्रचार प्रसार करने कि जरूरत है
हमारे समाज को जानकार बनाने कि जरूरत है
ताकि वो संवैधानिक हकों कि रक्षा कर सके

Tuesday, 11 October 2016

Who is reponsible of 2000 years slavery?

The country's 2,000 years of slavery of the blame?
Bhante Sumedhanand sermon was once a gathering, the gathering of the Buddhist Dhamma a Brahmin's voice echoed throughout the country because of the slave was born. Bhante then asked him Brahmin -
Srmn- O Brahmin! You say that your country became a slave of the Buddhist Dhamma.
Brahmin - yes Bhante! Buddhist Dhamma because my country became a slave.
Shramana - O Brahmin! When was the Buddha Dhamma in India?
Brahmin - O Bhante! About 2530 years ago.
Shramana - O Brahmin! Dhamma Buddhist empire in India was how long?
Brahmin - O Bhante! Until 2200 years.
Shramana - O Brahmin! The 320 years between India captive to a foreign king.
Brahmin - Bhante not.
Shramana - O Brahmin! Who was the last emperor of the Buddhist Dhamma?
Brahmin - O Bhante! Brihadratha emperor.
Shramana - O Brahmin! When the empire was Brihadratha.
Brahmin - O Bhante! Until 2200 years.
Shramana - O Brahmin! Brihadratha were killed by whom?
Brahmin - O Bhante! Sunga Pushpmitr Brihadratha by the commander.
Shramana - O Brahmin! India Brahmin Pushpmitr Sung after capturing what was announced?
Brahmin - O Bhante! The heads of the mighty and bring the Buddhists, the more money will be given to him.
Shramana - O Brahmin! Sunga Pushpmitr legislation which was created after the empire?
Brahmin - O shramana! Sumit Bhargava 2176 years ago was created by Manu.
Shramana - O Brahmin! What has been the creation of legislation that Manu who?
Brahmin - Hey Randy! Thousands of Indian society into castes Manu legislation by distributing the country's unity and strength was incised, and untouchability Oocnic state was established, the Indian people were jealous of each other, all except just the few warrior class India bans on people to take up arms, to take revenge from the other Indian people invitation for foreign people started to attack India.
Shramana - O Brahmin! The polity of the country due to the Buddha's Dhamma or righteousness Brahmin.
Brahmin - O Bhante! The Brahmin.
Shramana - O Brahmin! Century Buddhist Dhamma which was on the verge of completion?
Brahmin - O Bhante! Around the 7th century.
Shramana - O Brahmin! What's your shankaracharyas century Buddhist Dhamma announced that India was free?
Brahmin - O Bhante! In the 8th century.
Shramana - O Brahmin! Muhammad bin Qasim in 712 AD when the Emperor Dahir invaded, the emperor Dahir of losing what was the reason?
Brahmin - O shramana! Qasim said that if a Brahmin temple of the goddess, when he dropped the flag will be part Dahir army. Brahmani superstition was that the army ran away and we lost. Thus the foundation of slavery in India in the year 712 by a Brahmin because of treason laid.
Shramana - O Brahmin! After the 7th century by Mahmud Ghazni Somnath looted, whose power in the country was
Brahmin - O shramana! Brahmin religion.
Shramana - O Brahmin! Mahmud Ghazni when a million women in detention in India for his harem took their land, and whose power was in India?
Brahmin - O shramana! Brahmin religion.
Shramana - O Brahmin! Dhaba at the main gate of the fortress of Somnath Mahmood said the army was doing the Brahmin?
Brahmin - O shramana! Sitting on the walls of the fortress troops was pleased with the idea that Muslims still daring few minutes we will be destroyed by God.
Shramana - O Brahmin! In 1562, the year that the Jaipur ruler Bihari Mal Anvr Akbar did before?
Brahmin - O Bhante! King without a sword and shield raised Bihari Mal succumbed Akbar and his daughter was married to him, too.
Shramana - O Brahmin! Ranthambhore, Marwar, Bikaner, Jodhpur and Jaisalmer Akbar before kings did?
Brahmin - O Bhante! By surrender their unmarried girls proceeded to hand over to Akbar's harem.
Shramana - O Brahmin! When Guru Gobind Singh and Shivaji were fighting the Mughals in Punjab and Maharashtra respectively, the Brahmin's army was doing?
Brahmin - O shramana! Rajputs, Marathas and other Indian blood thirsty king Shivaji and Guru Gobind Singh were made.
Shramana - O Brahmin! Maharana Pratap had fought all his life through which the kings?
Brahmin - O Bhante! Ghulam Akbar Indian kings.
Shramana - O Brahmin! Rana Sanga who invaded India to be invited?
Brahmin - O Bhante! Beaver invited.
Shramana - O wise Brahmin! We Indians have become so impotent, how?
Brahmin - O Bhante! Brahmanical religion, karma, luck and principles Brhmsaty made impotent the Indian people.
Shramana - O wise Brahmin! Now tell your country or Brahmanical religion of slaves because of the Buddha's Dhamma.
Brahmin - O shramana! The Brahmanical religion .. 

रावण का ही दहन क्यों?

_*रावण का ही दहन क्यो?*
__इन्द्रदेव ने ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या के साथ बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__राजा पाण्डु ने माधुरी के साथ बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__पराशर ऋषि ने केवट की लड़की सत्यवती के साथ बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__बृहस्पति की पत्नी तारा का चन्द्र ने अपहरण करके बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__ब्रह्मा ने अपनी पुत्री सरस्वती के साथ जबरदस्ती वर्षो तक बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही??
__राजा नरक की रानियों के साथ कृष्ण ने जबरदस्ती सहवास/विवाह रचाया उसका दहन क्यो नही?
__कृष्ण ने अपने मामा रामण की पत्नी के साथ खुल्लम खुल्ला अवैध सम्बन्ध बनाया उसका दहन क्यो नही?
__भीष्म ने अम्बा;अम्बीका; अम्बालिका का अपहरण किया उसका दहन क्यो नही?
__राम के पूर्वज राजा दण्ड ने शुक्राचार्य की पुत्री अरजा के साथ बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__वायु देवता ने राजर्षि कुशनाश की कन्याओं के साथ बलात्कार करने कि कोशिश की उसका दहन क्यो नही?
__वीष्णु ने जालन्घर की पत्नी वृन्दा के साथ बलात्कार किया उसका दहन क्यो नही?
__आज बलात्कार इसीलिए तो नहीं रूक रहा है क्योकि हम बलात्कारियों की पूजा करते है;और जिस रावण ने अपनी बहन का बदला लेने के लिए सीता को ले गया पर उसे छुआ तक नहीं उसे सम्मान पूर्वक संभाला उस रावण को जलाते हैं!_

क्रांति की वजह

*यह पोस्ट,   अनु- सूचित जाति या जन- जाति   से सम्बन्धित  लोगो के लिए  पढना मैनडेटरी  है । क्योंकि   इस  ब्राह्मणवाद   को खत्म करने  के  लिए  यह  जानना जरूरी  है कि  ब्राह्मणवादी लोगों ने  इस  वर्ण  पर   क्या क्या  अत्याचार  किए थे।  जान कर आपके रोंगटे  खड़े हो जाएंगे।  इस   देश मे अंग्रेजी    शासन   नही   आता    तो    अनुमान    नही लगा    सकते  आज  क्या    हालत   होती । वैसे   अभी  भी   कोई   कसर   बाकि नही है।    आप      से   करबद्ध  अनुरोध  है  कि आप को   जब   भी  समय मिले   तो  यह   पोस्ट  जरूर जरुर  पढे ।*
🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

अंग्रेजों ने भारत पर 150 वर्षों तक राज किया ब्राह्मणों ने उनको भगाने का हथियार बन्द
आंदोलन क्यों चलाया?
जबकि भारत पर सबसे पहले हमला मुस्लिम
शासक मीर काशीम ने 712 ई. में किया! उसके बाद महमूद   गजनबी, मोहमंद गौरी, चन्गेज खान ने हमला किए और फिर  कुतुबदीन   एबक, गुलामवंश, तुगलकवंश, खिलजीवंश, लोदीवंश
फिर मुगल आदि वन्शो
ने भारत पर राज किया
और   खूब    अत्याचार
किए  लेकिन ब्राह्मण ने
कोई क्रांति या आंदोलन
नही चलाया ! फिर
अन्ग्रेजो के खिलाफ़ ही
क्यों क्रांति कर दी ।

*जानिये  क्रांति   और  आंदोलन की वजह ।*

1- अंग्रेजो  ने    1795
में अधिनयम 11  द्वारा
शुद्रों  को   भी    सम्पत्ति
रखने का कानून बनाया।

2- 1773 में ईस्ट इंडिया
कम्पनी ने रेगुलेटिग एक्ट पास किया जिसमें न्याय
व्यवस्था समानता    पर
आधारित थी ।  ।6 मई 1775 को  इसी  कानून द्वारा बंगाल के सामन्त ब्राह्मण  नन्द कुमार देव को फांसी हुई थी ।

3- 1804 अधिनीयम 3 द्वारा   कन्या  हत्या   पर रोक   अंग्रेजों  ने  लगाई (लडकियों के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपकाकर, माँ के
स्तन पर धतूरे का
लेप लगाकर, एवम्
गढ्ढा बनाकर उसमें दूध डालकर डुबो कर मारा जाता था ।

4- 1813 में ब्रिटिश सरकार ने कानून बनाकर शिक्षा ग्रहण करने का सभी जातियों और धर्मों के लोगों को अधिकार दिया।

5- 1813 में  ने दास प्रथा का अंत कानून बनाकर किया।

6-  1817  में     समान नागरिक संहिता कानून बनाया ।   1817    के पहले सजा का प्रावधान वर्ण के आधार पर था। ब्राह्मण को कोई   सजा नही होती थी ओर   शुद्र को   कठोर   दंड   दिया
जाता था। अंग्रेजो      ने सजा का प्रावधान समान कर दिया।

7- *1819 में अधि- नियम  नम्बर  7 द्वारा ब्राह्मणों  द्वारा    शुद्र  स्त्रियों के शुद्धिकरण पर रोक लगाई।*  (शुद्रों की शादी होने पर दुल्हन को अपने यानि दूल्हे  के घर न जाकर कम से कम तीन रात  ब्राह्मण के घर शारीरिक   सेवा देनी पड़ती थी।)

8- *1830 नरबलि प्रथा पर रोक -* (देवी देवता को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मण शुद्रों,  स्त्री   व् पुरुष दोनों को मन्दिर
में सिर पटक पटक कर
चढ़ा देता था। )

9- 1833   अधिनियम 87 द्वारा सरकारी सेवा में भेद भाव   पर   रोक अर्थात  योग्यता ही सेवा का  आधार     स्वीकार किया गया तथा कम्पनी केअधीन किसी भारतीय
नागरिक     को     जन्म स्थान, धर्म, जाति या रंग के आधार   पर   पद  से वंचित  नही   रखा    जा सकता है।

10- 1834  में   पहला भारतीय  विधि  आयोग का गठन हुआ । कानून
बनाने   की     व्यवस्था जाति,  वर्ण,  धर्म  और क्षेत्र की भावना से ऊपर उठकर  करना   आयोग का प्रमुख उद्देश्य था।

11-  *1835  प्रथम  पुत्र को गंगा दान पर रोक !*   (ब्राह्मणों ने नियम बनाया  की शुद्रों के घर यदि पहला बच्चा लड़का पैदा हो तो  उसे गंगा में फेंकदेना चाहिये।
पहला पुत्र ह्रष्ट-पृष्ट एवं
स्वस्थ पैदा होता है।यह
बच्चा ब्राह्मणों से लड़ न
पाए इसलिए पैदा होते ही गंगा को दान करवा देते थे। )

12- 7 मार्च 1835 को
लार्ड मैकाले ने   शिक्षा
नीति राज्य  का  विषय
बनाया और उच्च शिक्षा
को   अंग्रेजी   भाषा का
माध्यम  बनाया  गया।

13- 1835 को कानून बनाकर अंग्रेजों ने शुद्रों को कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया।

14- दिसम्बर 1829 के
नियम 17 द्वारा विधवाओं को जलाना अवैध घोषित कर सती प्रथा का अंत किया।

15- देवदासी   प्रथा पर
रोक लगाई। ब्राह्मणों के
कहने   से  शुद्र   अपनी
लडकियों को मन्दिर की
 सेवा के लिए  दान  देते थे। मन्दिर  के   पुजारी उनका शारीरिक शोषण करते थे। बच्चा पैदा होने पर उसे  फेंक देते थे।और उस बच्चे को हरिजन नाम  देते थे।
1921 को जातिवार जनगणना के आंकड़े के अनुसार अकेले मद्रास में कुल जनसंख्या 4 करोड़
 23 लाख थी जिसमें 2
लाख देवदासियां मन्दिरों में पड़ी थी।  यह प्रथा अभी भी दक्षिण भारत के मन्दिरो  में  चल रही है।

16- 1837 अधिनियम द्वारा ठगी प्रथा का अंत किया।

17- 1849 में कलकत्ता
 में एक बालिका विद्यालय जे ई डी बेटन ने स्थापित  किया।

18-  1854 में अंग्रेजों ने  3 विश्वविद्यालय कलकत्ता मद्रास और बॉम्बे में स्थापित किये। 1902 मे विश्वविद्यालय आयोग   नियुक्त किया गया।

19- 6 अक्टूबर 1860
को अंग्रेजों  ने  इंडियन
पीनल    कोड  बनाया।
लार्ड मैकाले ने सदियों
से  जकड़े   शुद्रों    की
जंजीरों  को  काट दिया
ओर भारत में जाति, वर्ण और धर्म के बिना  एक
समान   क्रिमिनल   लॉ
लागु कर दिया।

20- 1863 अंग्रेजों   ने कानून बनाकर   चरक पूजा पर रोक लगा दिया (आलिशान भवन एवं पुल निर्माण पर शुद्रों को
पकड़कर जिन्दा चुनवा
दिया जाता था इस पूजा
में मान्यता थी की भवन
और पुल ज्यादा दिनों
तक  टिकाऊ  रहेगें।

21- 1867 में  बहू विवाह प्रथा पर पुरे देश में  प्रतिबन्ध लगाने के
उद्देश्य से बंगाल सरकार
ने एक कमेटी गठित किया ।

22- 1871 में अंग्रेजों ने भारत में जातिवार गणना प्रारम्भ की। यह जनगणना 1941 तक हुई । 1948 में पण्डित नेहरू ने कानून बनाकर जातिवार गणना पर रोक लगा दी।

23- 1872 में सिविल
मैरिज एक्ट द्वारा 14
वर्ष से कम आयु की कन्याओं एवम् 18 वर्ष से कम आयु के लड़को
का विवाह वर्जित करके
बाल  विवाह  पर   रोक
लगाई।

24- अंग्रेजों ने महार और चमार रेजिमेंट बनाकर इन जातियों को सेना में  भर्ती किया लेकिन 1892  में ब्राह्मणों के दबाव के कारण सेना में अछूतों की भर्ती बन्द हो गयी।

25- रैयत वाणी पद्धति अंग्रेजों    ने    बनाकर प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार को  भूमि का स्वामी स्वीकार  किया।

26- 1918 में साऊथ
बरो कमेटी को भारत मे
अंग्रेजों ने भेजा ।   यह कमेटी भारत में   सभी जातियों का विधि
मण्डल (कानून बनाने
की संस्था) में भागीदारी
के लिए आया था। शाहू
जी महाराज   के  कहने पर  पिछङो    के   नेता भाष्कर   राव जाधव ने एवम् अछूतों के नेता डा
अम्बेडकर ने   अपने लोगों को विधि मण्डल में  भागीदारी के लिये
मेमोरेंडम दिया।

27- अंग्रेजो ने 1919 में भारत सरकार अधिनियम का गठन किया ।

28- 1919 में अंग्रेजो ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थीऔर
कहा था की इनके अंदर
न्यायिक चरित्र नही होता है।

29- 25 दिसम्बर1927
को डा अम्बेडकर द्वारा
मनु समृति का दहन किया। मनु स्मृति में
शूद्रों और   महिलाओं   को गुलाम   तथा  भोग  की वस्तु समझा जाता था एक  पुरूष   को अनगिनत  शादियां करने का धार्मिक अधिकार है। महिला अधिकार विहीन तथा दासी की स्थिति में थी। एक - एक औरत के अनगिनत  सौतने   हुआ करती थी   औरतो- शूद्रों को सिर्फ   और    सिर्फ गुलामी लिखा है जिसको एक  राक्षस मनु  ने  धर्म का नाम दिया है।

30- 1 मार्च 1930 को
डा अम्बेडकर द्वारा काला राम मन्दिर (नासिक)  प्रवेश का आंदोलन  चलाया।

31- 1927 को अंग्रेजों ने कानून बनाकर शुद्रों के सार्वजनिक स्थानों पर जाने का अधिकार दिया।

32- नवम्बर 1927   में साइमन   कमीशन   की नियुक्ति की। जो 1928 में भारत के अछूत लोगों की  स्थिति का सर्वे करने और उनको अतिरिक्त अधिकार देने के लिए आया। भारत के लोगों को अंग्रेज अधिकार न दे सके इसलिए इस कमीशन के भारत पहुँचते ही गांधी और लाला लाजपत राॅय ने इस कमीशनके विरोध में बहुत बड़ा आंदोलन चलाया। जिस कारण
साइमन कमीशन अधूरी
रिपोर्ट लेकर वापस
चला गया। इस पर
अंतिम फैसले के लिए
अंग्रेजों ने भारतीय
प्रतिनिधियों को 12
नवम्बर 1930 को लन्दन गोलमेज सम्मेलन में  बुलाया।

33- 24 सितम्बर 1932 को अंग्रेजों ने कम्युनल
अवार्ड घोषित किया
जिसमें प्रमुख अधिकार
निम्न दिए----

A--वयस्क मताधिकार

B--विधान मण्डलों और
संघीय सरकार में जन संख्या   के  अनुपात
में अछूतों को आरक्षण
का अधिकार

C--सिक्ख, ईसाई और मुसलमानों की तरह अछूतों (SC/ST )को  भी स्वतन्त्र निर्वाचन के क्षेत्र का अधिकार मिला। जिन क्षेत्रों में अछूत प्रतिनिधिखड़े होंगे उनका चुनाव केवल अछूत ही करेगें।

D--प्रतिनिधियोंको चुनने के लिए दो बार वोट का
अधिकार मिला  जिसमें
एक   बार  सिर्फ  अपने
प्रतिनिधियों को वोट देंगे
दूसरी   बार    सामान्य
प्रतिनिधियों   को   वोट देगे।

34- 19 मार्च 1928 को बेगारी प्रथा के विरुद्ध डा अम्बेडकर ने मुम्बई
विधान परिषद मेंआवाज
उठाई , जिसके बाद
अंग्रेजों ने इस प्रथा को
समाप्त कर दिया।

35- अंग्रेजों ने 1 जुलाई 1942 से लेकर 10 सितम्बर 1946 तक डाॅ अम्बेडकर को वायसराय की कार्य साधक कौंसिल में   लेबर   मेंबर बनाया। लेबरो को डा अम्बेडकर ने 8.3 प्रतिशत आरक्षण दिलवाया।

36-- 1937 में अंग्रेजों
ने भारत में प्रोविंशियल गवर्नमेंट   का    चुनाव करवाया।

37-- 1942 में अंग्रेजों
से डा. अम्बेडकर ने 50
हजार हेक्टेयर भूमि को
अछूतों एवम् पिछङो में
बाट देने के लिए अपील
किया ।  अंग्रेजों ने 20 वर्षों की समय सीमा तय किया था।

38- अंग्रेजों   ने  शासन प्रसासन में ब्राह्मणों  की भागीदारी को 100% से 2.5% पर लाकर खड़ा
कर दिया था।

इन्ही सब वजाह से ब्राह्मणों  ने अन्ग्रेजो के खिलाफ़  क्रांति शुरू कर दी क्योकि  अन्ग्रेजो  ने शुद्रो और महिलाओं को सारे अधिकार दे दिये थे और  सब जातियो के लोगो को एक समान अधिकार देकर सबको बराबरी मे लाकर खडा किया
   ☸जय भीम ☸
जनजागरण  हेतु  ज्यादा से ज्यादा ग्रुपों में शेयर करो  ताकि  ज्यादा से ज्यादा  अनुसूचित जाति और जनजाति  के भाई लोग अपना  ज्ञानवर्धन कर सकें । पढेंगे   तभी तो जानेंगे ।  इज्जत  से जीना चाहते  हो तो  देश से पाखण्ड वाद  हटाओ देश      की   अखण्डता बचाओ    पाखण्ड  मुक्त  भारत बनाओ ।

*यह सब जानकर अगर आप समझते  हैं कि मैने आपका समय व्यर्थ  किया तो माफी चाहता हूँ
🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

बेटियां

*बहुत खुबसूरत मैसेज*
   
👉बेटियाँ सब के नसीब में
      कहाँ होती है..
👉रब को जो घर पसंद आए
      वहाँ होती है बेटियां

   ==👧👧👭👧👧==

        🔰🚥🚥🔰

🌿➖बोये जाते हैं बेटे..
🌿➖पर उग जाती हैं
           बेटियाँ..

🌿➖खाद पानी बेटों को..
🌿➖पर लहराती हैं बेटियां.

🌿➖स्कूल जाते हैं बेटे..
🌿➖पर पढ़ जाती हैं
          बेटियां..

🌿➖मेहनत करते हैं बेटे..
🌿➖पर अव्वल आती हैं
          बेटियां..

🌿➖रुलाते हैं जब खूब बेटे.
🌿➖तब हंसाती हैं बेटियां.

🌿➖नाम करें न करें बेटे..
🌿➖पर नाम कमाती हैं
          बेटियां..

🌿➖जब दर्द देते हैं बेटे...
🌿➖तब मरहम लगाती
         हैं बेटियां..

🌿➖छोड़ जाते हैं जब बेटे..
🌿➖तो काम आती हैं
          बेटियां..

🌿➖आशा रहती है बेटों से.
🌿➖पर पूर्ण करती हैं
           बेटियां..

🌿➖हजारों फरमाइश से
           भरे हैं बेटे....
🌿➖पर समय की नज़ाकत
          को समझती बेटियां..
🌿➖बेटी को चांद जैसा
          मत बनाओ कि हर
         कोई घूर घूर कर देखे..

       📍लेकिन📍
    -----------------------
🌿➖बेटी को सूरज जैसा
         बनाओ ताकि घूरने से
        पहले सब की नजर झुक
        जाये..🌞🌞

     

✔==Send it to Your
        ➖Sister•
        ➖Friends•
        ➖Daughter•
        ➖Wife•
              

त्यौहार क्या हैं?

"भारतीय त्योहारों का इतिहास और कुच्छ नही  बस आर्य ब्राम्हणों कि जीत का जश्न है.
ब्राम्हणों के हर त्योहारों के पीछे मूलनिवासी महापुरूषों कि हत्या, बर्बादी  का राज छिपा है"

                   *-- बाबासाहेब आम्बेडकर*

त्यों = तुम्हारी
हार = हार

*(त्यौहार = तुम्हारी हार)*

सबसे बड़ी देशभक्ति

*इतना गुस्सा बाप रे बाप ।*

*बहुत गुस्से में है भारत की पब्लिक ।*

*बहिष्कार करो चीनी सामान का*

*खत्म कर दो पाकिस्तान को !!!*

परमाणु बम गिरा दो!!!
तबाह कर दो !!!!!
उसको उसकी औकात याद दिला दो.
फलां फलां !!!

बहुत बहुत प्यार करते है अपने देश को
और बहुत गुस्से में है सब देशप्रेमी..........

बसों, ट्रेनों, सीढियों पर पान गुटके थूकने वाले देशप्रेमी.

रोंग साइड से वाहन निकलने की जुगाड में लगे हुए देशप्रेमी.

सडको पर पहले निकलने की कोशिश में ट्राफिक जाम करने वाले देशप्रेमी.

सालों से टैक्स चोरी कर रहे देशप्रेमी.


2G, 3G, कोयला जैसे घोटालो को भूल जाने वाले देशप्रेमी

ब्यापम, ललित मोदी, विजय माल्या जैसे घोटालो को भूल जाने वाले देशप्रेमी

84 और 2002 दो जैसे दंगो को भूल जाने वाले और फिर से उन्ही के हात में सत्ता सोपने वाले देशप्रेमी

अपने देश के लोगो की कमाई ना हो जाये इस लिए और  अपनी ना कामी को छुपाने के लिए चीन से क्यूटो जैसी सिटी अपने देश में बनबाने बनबाने वाले देशप्रमी

चीन से सरदार पटेल की मूर्ति बनवाने वाले देशप्रमी
 

अपने फायदे के लिए पाकिस्तान को बिजली बेचने बाले देशप्रमी

अंडरवर्ल्ड के पैसो से बनी फिल्मो को 300-400 करोड का फायदा पहुचने वाले देशप्रेमी.


अलग अलग प्रदेशो के नाम पर लडने वाले देशप्रेमी.

अलग अलग भाषा वालो से नफ़रत करने वाले देशप्रेमी.

पानी के लिए लडने सरकारी संपत्तियो को स्वाहा करने वाले देशप्रेमी.

आरक्षण के लिए संपत्तियो को स्वाहा करने वाले देशप्रेमी.

गाय के नाम पर जातिवादी लड़ाई लडने वाले देशप्रेमी.

गाय के नाम पर तथा कथित हिन्दू अपने से छोटी जाती वालो को पीटने वाले देशप्रेमी


ट्रेनों के संडासो में गंदे तरीको से शौच कर पानी न डालने वाले देशप्रेमी.

खुली सडको पर बेशर्मो की तरह पेशाब वाले देशप्रेमी.

जाती के नाम पर अपने से पैसे में कमजोर को जलील करने वाले देशप्रमी

अपने ही देश के लोगो को जाती और धर्म के नाम पर लड़वाने वाले देशप्रमी

नन्हे मासूमो और औरतो की इज्जत तार तार करने वाले देशप्रेमी.

अपने से कमजोर वर्ग को मिल रहे आरक्षण जिस से की वो लोग भी देश के सभी लोगो के साथ विकाश  की धारा में बराबर आ सके उनका भी विरोध करने वाले देशप्रेमी

ट्रेनों में रिश्वत देकर टिकट की जुगाड करने वाले देशप्रेमी.

बिजली के खम्बो पर तार डालकर बिजली चुराने वाले देशप्रेमी.

मंदिरों में निचली जाती वालो को न घुसने देने वाले देशप्रेमी.

जहरीला मिलावटी सामान बेचने वाले देशप्रेमी.

एक दूसरे से और दूसरों की तरक्कियो से जलने वाले देशप्रेमी.

धर्म के नाम पर दंगा करवाने वाले देशप्रेमी

सेना को भी अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने वाले देशप्रेमी

कोई तथाकथित छोटी जाती वाला किसी बड़ी जाती वाले के बराबर आ जाये तो उस छोटी जाती वाले का विरोध करने वाले देशप्रेमी

सचमुच बहुत गुस्से में है ऐसे देशप्रेमी.

सलाम ऐसे देश प्रेमियों को.......

*देश के हालात पर कुछ लिखने की हिमत की है अच्छा लगे तो इस पोस्ट को हर भारतवासी तक पंहुचा दो कम से कम 10 लोगो को भेजो फिर देखते है आपको अपने देश से कितना प्रेम है*....

🤔🤔🤔

*अशोक विजयदशमी विशेष*

नमो बुद्धस्स जय भीम
🐘 जय बहुजन समाज 🐘

🔅 *अशोक  विजयदशमी विशेष* 🔅

*सम्राट अशोक*
राजकाल-       ३०४ ईसा पूर्व से २३२ ईसा पूर्व।
राज्याभिषेक- २७० ईसा पूर्व।
*जन्म*-            ३०४ ईसा पूर्व
पाटलिपुत्र, पटना।
*मृत्यु*-            २३२ ईसा पूर्व
पाटलिपुत्र, पटना।
*उत्तराधिकारी*-दशरथ मौर्य।
*पत्नी*-             देवी (वेदिस-महादेवी शाक्यकुमारी)
कारुवाकी (द्वितीय देवी तीवलमाता)।
असंधिमित्रा  अग्रमहिषी,
अहंकारा ,
पद्मावती
तिष्यरक्षिता

*वंश*-            मौर्य
*पिता*-           बिन्दुसार
*माता*-           सुभद्रांगी (उत्तरी परम्परा), रानी धर्मा (दक्षिणी परम्परा)
------------------------
चक्रवर्ती सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय)। (राजकाल ईसापूर्व 273-232) प्राचीन भारत में मौर्य राजवंश का चक्रवर्ती राजा था। उसके समय मौर्य राज्य उत्तर में हिन्दुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बंगाल से पश्चिम में अफ़गानिस्तान तक पहुँच गया था। यह उस समय तक का सबसे बड़ा भारतीय साम्राज्य था। सम्राट अशोक को अपने विस्तृत साम्राज्य से बेहतर कुशल प्रशासन तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए जाना जाता है।[1][2]

जीवन के उत्तरार्ध में सम्राट अशोक भगवान बुद्ध की मानवतावादी शिक्षाओं से प्रभावित होकर बौद्ध हो गये और उन्ही की स्मृति मे उन्होने एक स्तम्भ खड़ा कर दिया जो आज भी नेपाल में उनके जन्मस्थल - लुम्बिनी - मे मायादेवी मन्दिर के पास अशोक स्तम्भ के रुप मे देखा जा सकता है। उसने बौद्ध धर्म का प्रचार भारत के अलावा श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान, पश्चिम एशिया, मिस्र तथा यूनान में भी करवाया। अशोक अपने पूरे जीवन मे एक भी युद्ध नहीं हारे। सम्राट अशोक के ही समय में 23 विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई जिसमें तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, कंधार आदि विश्वविद्यालय प्रमुख थे। इन्हीं विश्वविद्यालयों में विदेश से कई छात्र शिक्षा पाने भारत आया करते थे।

*कलिंग की लड़ाई*
अशोक ने अपने राज्याभिषेक के ८वें वर्ष (२६१ ई. पू.) में कलिंग पर आक्रमण किया था। आन्तरिक अशान्ति से निपटने के बाद २६९ ई. पू. में उसका विधिवत्‌ अभिषेक हुआ तेरहवें शिलालेख के अनुसार कलिंग युद्ध में एक लाख ५० हजार व्यक्‍ति बन्दी बनाकर निर्वासित कर दिए गये, एक लाख लोगों की हत्या कर दी गयी। सम्राट अशोक ने भारी नरसंहार को अपनी आँखों से देखा। इससे द्रवित होकर अशोक ने शान्ति, सामाजिक प्रगति तथा धार्मिक प्रचार किया।
कलिंग युद्ध ने अशोक के हृदय में महान परिवर्तन कर दिया। उसका हृदय मानवता के प्रति दया और करुणा से उद्वेलित हो गया। उसने युद्धक्रियाओं को सदा के लिए बन्द कर देने की प्रतिज्ञा की। यहाँ से आध्यात्मिक और धम्म विजय का युग शुरू हुआ। उसने बौद्ध धर्म को अपना धर्म स्वीकार किया।

सिंहली अनुश्रुतियों दीपवंश एवं महावंश के अनुसार अशोक को अपने शासन के चौदहवें वर्ष में निगोथ नामक भिक्षु द्वारा बौद्ध धर्म की दीक्षा दी गई थी। तत्पश्‍चात्‌ मोगाली पुत्र निस्स के प्रभाव से वह पूर्णतः बौद्ध हो गया था। दिव्यादान के अनुसार अशोक को बौद्ध धर्म में दीक्षित करने का श्रेय उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षुक को जाता है। अपने शासनकाल के दसवें वर्ष में सर्वप्रथम बोधगया की यात्रा की थी। तदुपरान्त अपने राज्याभिषेक के बीसवें वर्ष में लुम्बिनी की यात्रा की थी तथा लुम्बिनी ग्राम को करमुक्‍त घोषित कर दिया था।

*बौद्ध धर्म अंगीकरण*

कलिंग युद्ध में हुई क्षति तथा नरसंहार से उसका मन युद्ध से ऊब गया और वह अपने कृत्य को लेकर व्यथित हो उठा। इसी शोक से उबरने के लिए वह बुद्ध के उपदेशों के करीब आता गया और अंत में उसने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया।

बौद्ध धर्म स्वीकारने के बाद उसने उसे अपने जीवन मे उतारने का प्रयास भी किया। उसने शिकार तथा पशु-हत्या करना छोड़ दिया। उसने ब्राह्मणों एवं अन्य सम्प्रदायों के सन्यासियों को खुलकर दान देना भी आरंभ किया। और जनकल्याण के लिए उसने चिकित्यालय, पाठशाला तथा सड़कों आदि का निर्माण करवाया।
उसने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए धर्म प्रचारकों को नेपाल, श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया, मिस्र तथा यूनान भी भेजा। इसी कार्य के लिए उसने अपने पुत्र एवं पुत्री को भी यात्राओं पर भेजा था। अशोक के धर्म प्रचारकों में सबसे अधिक सफलता उसके पुत्र महेन्द्र को मिली। महेन्द्र ने श्रीलंका के राजा तिस्स को बौद्ध धर्म में दीक्षित किया, और तिस्स ने बौद्ध धर्म को अपना राजधर्म बना लिया और अशोक से प्रेरित होकर उसने स्वयं को 'देवनामप्रिय' की उपाधि दी।

अशोक के शासनकाल में ही पाटलिपुत्र में तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता मोगाली पुत्र तिष्या ने की। यहीं अभिधम्मपिटक की रचना भी हुई और बौद्ध भिक्षु विभिन्‍न देशों में भेजे गये जिनमें अशोक के पुत्र महेन्द्र एवं पुत्री संघमित्रा भी सम्मिलित थे, जिन्हें श्रीलंका भेजा गया।

अशोक ने बौद्ध धर्म को अपना लिया और साम्राज्य के सभी साधनों को जनता के कल्याण हेतु लगा दिया। अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए निम्नलिखित साधन अपनाये-

(क) धर्मयात्राओं का प्रारम्भ,
(ख) राजकीय पदाधिकारियों की नियुक्‍ति,
(ग) धर्म महापात्रों की नियुक्‍ति,
(घ) दिव्य रूपों का प्रदर्शन,
(च) धर्म श्रावण एवं धर्मोपदेश की व्यवस्था,
(छ) लोकाचारिता के कार्य,
(ज) धर्मलिपियों का खुदवाना,
(झ) विदेशों में धर्म प्रचार को प्रचारक भेजना आदि।
अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार का प्रारम्भ धर्मयात्राओं से किया। वह अभिषेक के १०वें वर्ष बोधगया की यात्रा पर गया। कलिंग युद्ध के बाद आमोद-प्रमोद की यात्राओं पर पाबन्दी लगा दी। अपने अभिषेक २०वें वर्ष में लुम्बिनी ग्राम की यात्रा की। नेपाल तराई में स्थित निगलीवा में उसने कनकमुनि के स्तूप की मरम्मत करवाई। बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने साम्राज्य के उच्च पदाधिकारियों को नियुक्‍त किया। स्तम्भ लेख तीन और सात के अनुसार उसने व्युष्ट, रज्जुक, प्रादेशिक तथा युक्‍त नामक पदाधिकारियों को जनता के बीच जाकर धर्म प्रचार करने और उपदेश देने का आदेश दिया।

अभिषेक के १३वें वर्ष के बाद उसने बौद्ध धर्म प्रचार हेतु पदाधिकारियों का एक नया वर्ग बनाया जिसे 'धर्म महापात्र' कहा गया था। इसका कर्य विभिन्‍न धार्मिक सम्प्रदायों के बीच द्वेषभाव को मिटाकर धर्म की एकता स्थापित करना था।

विद्वानों अशोक की तुलना विश्‍व इतिहास की विभूतियाँ कांस्टेटाइन, ऐटोनियस, अकबर, सेन्टपॉल, नेपोलियन सीजर के साथ की है।

अशोक ने अहिंसा, शान्ति तथा लोक कल्याणकारी नीतियों के विश्‍वविख्यात तथा अतुलनीय सम्राट हैं। एच. जी. वेल्स के अनुसार अशोक का चरित्र “इतिहास के स्तम्भों को भरने वाले राजाओं, सम्राटों, धर्माधिकारियों, सन्त-महात्माओं आदि के बीच प्रकाशमान है और आकाश में प्रायः एकाकी तारा की तरह चमकता है।"

*शिलालेख*
सम्राट अशोक द्वारा प्रवर्तित कुल ३३ अभिलेख प्राप्त हुए हैं जिन्हें अशोक ने स्तंभों, चट्टानों और गुफ़ाओं की दीवारों में अपने २६९ ईसापूर्व से २३१ ईसापूर्व चलने वाले शासनकाल में खुदवाए। ये आधुनिक बंगलादेश, भारत, अफ़्ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और नेपाल में जगह-जगह पर मिलते हैं और बौद्ध धर्म के अस्तित्व के सबसे प्राचीन प्रमाणों में से हैं।

इन शिलालेखों के अनुसार अशोक के बौद्ध धर्म फैलाने के प्रयास भूमध्य सागर के क्षेत्र तक सक्रिय थे और सम्राट मिस्र और यूनान तक की राजनैतिक परिस्थितियों से भलीभाँति परिचित थे। इनमें बौद्ध धर्म की बारीकियों पर ज़ोर कम और मनुष्यों को आदर्श जीवन जीने की सीखें अधिक मिलती हैं। पूर्वी क्षेत्रों में यह आदेश प्राचीन मगधी भाषा में ब्राह्मी लिपि के प्रयोग से लिखे गए थे। पश्चिमी क्षेत्रों के शिलालेखों में भाषा संस्कृत से मिलती-जुलती है और खरोष्ठी लिपि का प्रयोग किया गया। एक शिलालेख में यूनानी भाषा प्रयोग की गई है, जबकि एक अन्य में यूनानी और अरामाई भाषा में द्विभाषीय आदेश दर्ज है। इन शिलालेखों में सम्राट अपने आप को "प्रियदर्शी" (प्राकृत में "पियदस्सी") और देवानाम्प्रिय (यानि देवों को प्रिय, प्राकृत में "देवानम्पिय") की उपाधि से बुलाते हैं।
*मृत्यु*
अशोक ने लगभग 40 वर्षों तक शासन किया जिसके बाद लगभग 234 ईसापूर्व में उसकी मृत्यु हुई। उसके कई संतान तथा पत्नियां थीं पर उनके बारे में अधिक पता नहीं है। उसके पुत्र महेन्द्र तथा पुत्री संघमित्रा ने बौद्ध धर्म के प्रचार में योगदान दिया।

अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य राजवंश लगभग 50 वर्षों तक चला।
मगध तथा भारतीय उपमहाद्वीप में कई जगहों पर उसके अवशेष मिले हैं। पटना (पाटलिपुत्र) के पास कुम्हरार में अशोककालीन अवशेष मिले हैं। लुम्बिनी में भी अशोक स्तंभ देखा जा सकता है। कर्नाटक के कई स्थानों पर उसके धर्मोपदेशों के शिलोत्कीर्ण अभिलेख मिले हैं।
काल्पनिक कथाओं के सहारे
मानवता को शर्मिन्दा करने वाला
ब्राह्मणवाद
जिसका मतलब
गैर बराबरी
छुआछूत
स्ञी दासता
असमानता
आदिवासियों का पृथक्करण करके उनको सिविल सोसाइटी से दुर रखना
धर्म के नाम पर मुसलमानों को काल्पनिक दुश्मन बनाकर
SC/ST/OBC के लोगों को जो कि शुद्र अतिशुद्र हैं
को हिन्दू धर्म कि चादर ओढा कर सत्ता लेकर
SC/ST/OBC and minority के लोगों पर अलग अलग से अत्याचार करना
उनके संवैधानिक अधिकारों को षडयंत्र पुर्वक
निजिकरण करके
वैश्वीकरण करके
नये नये कानून बना कर छिनना
SAG के बहाने
आदिवासियों कि बेशकीमती जमीन को उधोगपतियों को कोडियो के दाम में देना
सभी मूलनिवासी बहुजनों को षडयंत्र करके
उनको एक नहीं होने देना
उनको हमेशा गरीब रखना ताकि वो कभी पेट के अलावा सोच ही नहीं सके

इसलिए अब

सिर्फ और सिर्फ
ब्राह्मणवाद जलेगा
सिर्फ ब्राह्मणवाद का दहन होगा

मूलनिवासी इतिहास

sir Manohar barkade ji ki wall se मूलनिवासी इतिहास *ये है भारत का असली इतिहासl बाकि सब झूठ हैl* इस पोस्ट के अन्दर दबे हुए इतिहास के प...